Thursday, 9 July 2015

      भारतीय इन्टरनेट स्पीड की दुर्दशा का मज़ाक,दुनिया की सबसे बड़ी वीडियो साईट कम्पनी u-tube ने, उड़ाया 
        आपको ध्यान होगा हमने 22 Oct 2014 को एक लेख लिखा था,जिसका शीर्षक था "लंगड़ी चींटी जैसी चाल का मारा,भारतीय इंटरनेट उपभोक्ता बेचारा "उस लेख के द्वारा हमने भारत में इंटरनेट की दिनो दिन खराब होती हुई हालत का जिक्र किया था|
         हमारे उस लेख में कही हुई एक - एक बात का अनुमोदन Ericsson co. ने अपने एक सर्वे के द्वारा 28 Apr 2015 को किया था,जिसमे उन्होंने पाया था कि,भारत में 2G और 3G इन्टरनेट स्पीड एक सामान हैं तथा 60% से 70% भारतीय इन्टरनेट उपभोक्ता बहुत परेशान हैं आदि आदि |
        अब हमारे उस लेख की सत्यता पर मोहर लगाने वाला एक विज्ञापन (AD Film) दुनिया की सबसे बड़ी video site co.  U-TUBE  ने जारी किया है,जिसके बोल कुछ इस प्रकार हैं ;-
        रुक-रुक खाये झटके ,घूम घूम है अटके,रुक- रुक खाये झटके,.........इंडिया में ऑनलाइन विडियो देखना काफ़ी सर घुमाने वाला काम है,इसलिये U-TUBE लाया है नया ऑफलाइन फीचर   
      हमारे पहले लेख को लिखे हुए नौ महीने हो गये,अगर इन्टरनेट की स्पीड के बारे में हमारी सरकार ने कुछ सोचा होता तो शायद आज भारत को U-TUBE Co.के द्वारा इतना बेइज्जत होना न पड़ता, क्योंकि विज्ञापन में खासकर भारत (india) का नाम लिया गया है|
        परन्तु हमारे संचार मंत्री जी को शायद यह विज्ञापन देख कर भी शर्म नहीं आयेगी,क्योंकि उन्हें तो मीडिया के सामने खुश होकर यह बताने में मजा आता है की कॉल ड्रॉप तो उनकी भी होती है | न ही हमारी पांचों बड़ी इंटरनेट प्रोवाइडर कम्पनिओं को शर्म आएगी क्योंकि उन्हें तो जब उपर से शह मिली हुई है कि भारत की बेवकूफ पब्लिक को खूब लूटो,खूब रेट बढाओ,स्पीड कम करते जाओ,कोई कुछ बोलने वाला नहीं है,पेमेंट भी एडवांस में लो,सही काम भी न करो फिर भी बेचारी पब्लिक तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पायेगी| क्योंकि कम्पनिओं के ऊपर बैठे लोग,उनके कार्य का आकलन करने वाले लोग ,शायद उनको फायदा पहुचाने के लिए कार्य कर रहें है न कि भारत की जनता के हितों की रक्षा करने के लिए,क्योंकि पिछले डेढ़ साल में इंटरनेट  के रेट दोगुने हो गए और स्पीड आधी हो गयी,परन्तु किसी भी नियामक अधिकारी का कोई बयान आपने देखा,सुना या पढ़ा नहीं होगा|
         जब सइयां भए कोतवाल तो डर काहे का | नियामक संस्थान ने ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं बनाई है जिससे वो कम्पनिओं वो बाध्य कर सके,उनसे कम से कम एक स्पीड की भरपाई न होने पर सवाल उठा सके,ऐसी स्थिति में कम्पनियां भरपूर फायेदा उठा रहीं हैं और पब्लिक मजबूर है उनके द्वारा लुटने के लिए |
         नियामक संस्थान ने शिकायत करने का भी जो तरीका बनाया है वो भी कुछ ऐसा है की आपको उसी से शिकायत करनी है जो आपको सता रहा है,यानि कि जो आपको मार रहा है,आपको उसी से कहना है की भईया ,जोर से न मारो ,बहुत चोट लग रही है ,ज़रा धीमे मारो,आप की बड़ी मेहरबानी होगी ,वर्ना आप अपनी शिकायत अपने से ऊपर वाले भईया से कर दो ,की आप हमें मार रहे हो वो आप को सजा दें| भई वाह क्या तरीका है |
          हमारे आकलन के हिसाब से भारत में इन्टरनेट बहुत बदतर हालत में है और पूरी तरह से भगवान् भरोसे है,और हमारे प्रधान मंत्री जी इसी इन्टरनेट के भरोसे ' डिजिटल इंडिया 'का ख्वाब भारत की भोली-भाली जनता को दिखा रहें है,जबकि डिजिटल इंडिया स्कीम का सारा दारोमदार इन्टरनेट पर ही कायम होगा, कैसे होगा यह या तो मोदी जी जानते हैं या भगवान् जानता है, हम तो बस वो ही जानते है जो दिखाई दे रहा है, जैसे बैंकों में लगी लाइनें,क्या हुआ कनेक्टिविटी नहीं है, सरकारी ऑफिस में लगी लाइनें ,क्या हुआ काम नहीं हो सकता कंप्यूटर में कनेक्टिविटी नहीं है, रेलवे रिजर्वेशन काउंटर ,लम्बी लाइनें परेशान लोग ,क्या हुआ जब कनेक्टिविटी आएगी तब काम होगा |
          ऐसे सैकड़ों उदाहरण से आप लोगों का रोज वास्ता पड़ता होगा,आखिर ये सब इन्टरनेट की स्पीड और खराबी के कारण ही तो है,तो क्या हमारे इन्टरनेट के भाग्य-विधाता ,संचार मंत्री जी इस तरफ भी थोड़ा ध्यान देंगें?
            धन्यवाद |
    KC Sir              [K.C.MEHROTRA]
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Tuesday, 7 July 2015

                    भारतीय बुजुर्ग बने फेसबुक के प्रेमी, क्या कारण - क्या निवारण 
       फेसबुक सोशल साईट पर सक्रिय रहने वाले लोगों से अगर आप पूछें या वो खुद आपको बतायें,तो आपको इस तथ्य की जानकारी होगी की पिछले साल दो साल से फेसबुक पर " people you may know" की जो लिस्ट दिखाई पड़ती है,उस लिस्ट में 45-50 साल या उससे ऊपर की उम्र के पुरुष या महिलाओ के नाम(खासकर पुरुषों के नाम और चित्र )बहुत अधिक दिखाई पड़ने लगे हैं|
       क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया,अगर नहीं तो हमारी आपसे प्रार्थना है कि आप यदि फेसबुक का इस्तेमाल खुद करते हैं तो खुद देखें, अन्यथा अपने घर के उस सदस्य से इस बात की जानकारी लेने की कोशिश करें जो फेसबुक का इस्तेमाल करता हो,कि क्या पिछले साल दो साल में यह बदलाव आया है?
       अगर यह बदलाव वाकई आया है तो,क्यों आया है,किसलिए आया है,इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी | हमें इस बदलाव के पीछे के सभी कारणों को जानने की कोशिश करनी होगी|
       क्या बुजुर्गों को अपनों के द्वारा ठुकराया गया?
       क्या बुजुर्गों को अपनों से वह अपनापन नहीं मिला जिसके वो हक़दार थे?
       क्या बुजुर्ग अपने-आप को अकेला महसूस करते है?
       क्या बुजुर्ग अपनों से प्यार व् देखभाल न मिलने के कारण अपने को उपेछित महसूस करते हैं?
       क्या बड़ी संख्या में बच्चों का अपनी जीविका कमाने के कारण अपने मान-बाप से दूर रहने के कारण? 
       शायद और भी बहुत से कारण हो सकते हैं,जिसकी वजह से आज के बुजुर्ग ने अपने आप के लिए यह रास्ता चुना,और वे अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए फेसबुक से दोस्ती करना चाहते हैं,या यों कहिये की फेसबुक के रास्ते दोस्त ढूंढ कर अपने एकांत को खुशगवार बनाना चाहते हैं|
        शायद फेसबुक की तरफ हाथ बढ़ाने वाले बुजुर्गों के दिमाग में आया होगा की अपनों से न सही अपने समाज से,या नाते-रिश्तेदार से,आस पड़ोस वालों से, बचपन के बिछड़े साथियों से,साथ में पढ़े सहपाठियों से,और यह सब भी न सही,तो सारे जहां में फैले करोणों लोगों में से कुछ तो ऐसे दोस्त फेसबुक बना ही देगा,जो हमारे एकांकीपन को दूर कर सकेंगें,दूर बैठे ही सही कुछ बातें कुछ हँसी-मजाक आपस में कर सकेंगें|
         हमको तो इसमें कुछ गलत नहीं लगता है,इसके द्वारा हमारे बुजुर्गवार अगर अपना समय ख़ुशी ख़ुशी बिता सकें,अपने आपको व्यस्त रख सकें,एवं साथ-साथ दुनिया में क्या चल रहा है,इस-सबसे भी वे अछूते न रहें,तो उनके अपने लोग,जो उन्हें किसी भी कारणवश समय नहीं दे पा रहे थे या दूर होने के कारण उनकी देखभाल नहीं कर पा रहे थे,वे भी खुश होंगें| 
         तो आइये हम - आप मिल कर आज यह प्रतिज्ञा करें की हमारे जो भी बुजुर्गवार अभी तक फेसबुक आदि किसी भी सोशल साईट से नहीं जुड़ें हैं,हम उनको उससे जोड़ने का भरपूर प्रयास करेंगें,जिससे वो लोग भी हमारे नवजवानों के साथ कंधे से कन्धा मिला कर गर्व का अनुभव कर सकें,और एक बार फिर से उनके अन्दर स्फूर्ति का संचार हो एवं जीवन जीने की ललक बढ़े,वे अपने-आप को उपेछित न समझें| 
         अगर आपको इस बारे में कुछ कहना है तो आपका स्वागत है|
         धन्यवाद्
    KC Sir              [K.C.MEHROTRA]
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