Monday, 8 March 2021

स्वास्थ्य बीमा आजकल क्यों जरूरी है

 


बीमारियों से निपटने के लिए आजकल अत्यन्त आवश्यक है स्वास्थ्य बीमा

क्या आप उन लोगों में शामिल हैं, जो सोचते हैं कि स्वास्थ्य बीमा केवल बूढ़ों और बीमार लोगों के लिए होता है? क्या आपने कभी सोचा है कि अस्पताल के अप्रत्याशित खर्च के बीच बीमारियों के लिए बीमा कवर होना वरदान साबित हो सकता है एवं आपके सारे तनाव को दूर कर सकता है?

जरा इस परिदृश्य पर विचार करें, जिसमें भगवान ना करे कि आपको हृदय रोग के इलाज के लिए पांच लाख रुपये की राशि अचानक खर्च करनी पड़ जाये। क्या,आप नहीं चाहेंगे कि वही राशि 500 रुपये के मामूली मासिक प्रीमियम पर कवर हो जाए। इलाज का बिल अपनी जेब से देने के बजाए यह ज्यादा बेहतर सौदा नहीं है? अगर कुछ बातों पर गौर करें तो आप जानेंगे कि स्वास्थ्य बीमा को अनदेखा क्यों नहीं करना चाहिए।

आज की बदलती जीवनशैली बन सकती है बीमारी का बड़ा कारण

देर रात तक काम करना, खाने की खराब आदतें, कोई व्यायाम ना करना और अत्यधिक तनाव, ये कारक किसी भी सेहतमंद व्यक्ति को चंद पलों में बीमार करने के लिए पर्याप्त हैं। इन स्थितियों से सुरक्षित होने के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना में निवेश करना फायदेमंद है।

अपने और परिवार के स्वास्थ्य को महत्व देना अब बहुत जरूरी हो गया है हो गया है

यह हैरानी की बात नहीं है कि हम खुद को सुरक्षित करने की बजाए चीजें इकट्ठा करने पर ज्यादा धन व्यय करते हैं? हम खुद को आखिर में रखने का फैसला करते हैं, जबकि आवश्यकता खुद को पहले रखने की है। हमें निश्चित रूप से पता है कि घर और कार की मरम्मत बेहद महंगी हो सकती है,पर हम कार का बीमा कर लेंगें पर अपने आप का नहीं,लेकिन क्या आपने कभी विचार किया है कि किसी अशुभ दुर्घटना होने की दशा में आप खुद की मरम्मत कैसे कराएंगे? खुद को सुरक्षित कैसे रक्खेंगें ?

इलाज से बेहतर है परहेज व सावधानी

गंभीर बीमारी की हालत में चिकित्सा खर्च में मदद के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदें। इसके साथ ही गंभीर बीमारियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सालाना स्वास्थ्य जांच और अन्य जांच कराएं, जिससे उनका समय रहते इलाज हो सके। जरूरी है कि आप शुरू से ही सावधानी बरतें और अगर चूक हो भी जाए, तो स्वास्थ्य बीमा की मदद लें।

आपातकालीन स्थिति में महत्वपूर्ण है स्वास्थ्य बीमा

स्वास्थ्य बीमा आज के समय में विशेष रूप से आपातकालीन स्थिति में महत्वपूर्ण है। एक स्वास्थ्य बीमा अस्पताल में भर्ती होने के खर्चे, डॉक्टर की फीस और दवा के खर्चे को कवर कर सकती है। मनुष्य बहुत आशावादी होते हैं। हम हमेशा मानते हैं कि हमारा आने वाला कल खुश, अधिक समृद्ध और बेहतर होगा लेकिन वास्तव में कल किसने देखा है? भारतीयों को स्वास्थ्य बीमा खरीदने की आवश्यकता है क्योंकि हम अपने आहार, अस्वस्थ जीवन शैली, बढ़ते तनाव और बढ़ते शहरीकरण के कारण मोटापा और हृदय रोग जैसी जोखिम बीमारियों के लिए अति संवेदनशील हैं।

भारत का स्वास्थ्य देखभाल खर्च पिछले कुछ वर्षों में आसमान छू गया है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट कहती है कि भारतीय अपने स्वास्थ्य खर्च का लगभग 70 फीसदी अपनी जेब से देते हैं। अनपेक्षित चिकित्सा मजबूरियों से एक परिवार का बजट बिगड़ जाता है, यही कारण है कि स्वास्थ्य बीमा जल्दी खरीदना महत्वपूर्ण है।

बीमा के साथ कैशलेस क्लेम बेनिफिट भी मिलेगा

हेल्थ केयर प्लान खरीदने से आपको न सिर्फ गंभीर बीमारियों के लिए कवरेज मिलेगा, बल्कि इसके तहत लोगों को कैशलेस क्लेम बेनिफिट भी मिलता है, इतना ही नहीं, इसके तहत आपको कर-छूट का लाभ भी मिलता है।

कम प्रीमियम पर मिलेगा व्यापक कवर

आम तौर पर युवाओं को लगता है कि वे बहुत स्वस्थ हैं, वे व्यायाम करना पसंद करते हैं, अच्छा भोजन करते हैं और उनमें कोई बुरी आदतें नहीं हैं एवं धूम्रपान और शराब पीने जैसे काम वे सीमित रूप से करते हैं इसलिए उन्हें स्वास्थ्य बीमा की आवश्यकता नहीं है। लेकिन सच्चाई यह है कि, जब तक आपको कोई चिकित्सा समस्या नहीं है, तब तक जल्द से जल्द स्वास्थ्य बीमा लेना बेहतर है। इससे व्यक्ति को जीवन में बाद में पॉलिसी खरीदने के मुकाबले कम प्रीमियम पर एक व्यापक कवर प्राप्त करने में मदद मिलती है।

उम्र के साथ बढ़ता है स्वास्थ्य बीमा का खर्च

इसके साथ ही आपको बता दें कि स्वास्थ्य बीमा खरीदने का खर्च उम्र के साथ बढ़ता जाता है, क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ विभिन्न बीमारियों की संभावना पॉलिसी को जटिल बनाती हैं और प्रीमियम बढ़ा सकती हैं। जीवन की शुरुआत में स्वास्थ्य बीमा खरीदने का एक अन्य कारण क्युमुलेटिव बोनस का लाभ उठाना है। एक बूढ़े व्यक्ति की तुलना में एक युवा की क्लेम फाइल करने की संभावना कम है। इस तरह का क्युमुलेटिव बोनस बीमित राशि के 50 फीसदी से अधिक हो सकता है, जिसका अर्थ है कि आपकी बीमा राशि मूल बीमा राशि का 150 फीसदी से 200 फीसदी हो जैसा कि  HDFC ERGO General Insurance के ऑप्टिमा रिस्टोर प्लान में  है जबकि आप बीमा राशि के केवल 100 फीसदी के लिए प्रीमियम का भुगतान करते हैं,और आप तीन गुना तक कवर को प्राप्त कर सकते हैं।ये केवल कुछ कारण हैं कि स्वास्थ्य बीमा को जीवन में बाद की बजाय पहले ही खरीदा जाना चाहिए।

वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करता है स्वास्थ्य बीमा 

इस संदर्भ में तो मेरा कहना है कि लोगों को स्वास्थ्य बीमा को एक ठोस दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखना शुरू करना होगा, जो आपके मानसिक और वित्तीय स्वास्थ्य के लिए अच्छा रिटर्न देता है। एक पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी मन की शांति प्रदान करती है, आपातकालीन स्थिति के दौरान मजबूती प्रदान करती है, और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करती है। हालांकि, कई लोग स्वास्थ्य बीमा कवर तब खरीदते हैं जब वे स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव करना शुरू करते हैं और तब तक बहुत देर हो जाती है। हमारे देश में स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार बढ़ती कीमतों के साथ, और बीमारियों के बढ़ते मामलों के साथ,बीमा एक आवश्यकता है।

इसलिये जल्दी से जल्दी हमसे मिलें और अपना और अपने परिवार का स्वास्थ्य बीमा करवायें।
KC Sir
Krishan Chandra Mehrotra  

HDFC ERGO General Insurance Co.Ltd.
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Tuesday, 18 June 2019

झटका बिजली का

उ प्र की जनता को लगेगा बिजली का बड़ा झटका।
तैयार रहें झटका खाने के लिये, यदि आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं,क्योंकि योगी जी के विद्युत मंत्री पण्डित श्रीकांत शर्मा जी देने जा रहे है एक उपहार कर्रेंट के रूप में ,उत्तर प्रदेश की जनता को, जिन्होंने 63 सांसदों को जिताकर भेजा है।

पण्डित श्रीकान्त शर्मा विद्युत मंत्री उत्तर प्रदेश बिजली बिल में बढ़ोतरी कर प्रदेश की जनता को बड़ा झटका देने वाले हैं,उत्तर प्रदेश की जनता पहले से ही बढे बिजली दर से त्राहि त्राहि कर रही हैं ऐसे में पण्डित श्रीकान्त शर्मा को बहुत फूँक फूँक कर कदम रखना पड़ेगा,जब वो बिजली के दाम बढ़ाने की सोच रहे हैं। उत्तर प्रदेश में पहले से ही बिजली के दाम केजरीवाल की दिल्ली के मुकाबले दुगने और तिगुने से भी ज्यादा हैं,और बीजेपी शासित गुजरात से भी बहुत ज़्यादा हैं।

      दाम बढ़ाने से उत्तर प्रदेश की अनुशासित जनता चाहें कुछ न बोले,परन्तु विरोधी दल के लोग कतई चुप नहीं बैठेंगे।अगर मंत्री जी को समझ में नहीं आ रहा है कि किस तरह से बिजली के दाम न बढ़ाये जाएं तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से सलाह ले लें कि वो कैसे पिछले "चार वर्षों " से इतने कम दाम में दिल्ली को बिजली पहुँचा रहे हैं और दर में कोई  वृद्धि नहीं की है।जनता को लाभ पहुंचाने के लिए अपने विरोधी अरविन्द केजरीवाल से मशवरा करने में कोई हिचक नहीं करनी चाहिए,और अगर केजरीवाल से बात करने में हिचक हो तो गुजरात के अपने समकक्ष मंत्री से सलाह लें,क्योंकि अगर बिजली के दाम बढ़ गए तो बीजेपी को विरोधी दलों के बड़े प्रहार सहने पड़ेंगें साथ ही चुनाव में जनता का आक्रोश झेलना पड़ेगा| विद्युत मंत्री पण्डित श्रीकान्त शर्मा एवं मुख्यमंत्री योगी जी की मंशा अगर जनता पर अतरिक्त बोझ नहीं डालना है तो पूरी तरह से सलाह मशवरा करने के बाद ही कदम उठाना जनहित में होगा |
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KC Sir

Wednesday, 29 May 2019

संस्कारों की महत्ता


आज कुछ ऎसा हुआ,जो संस्कारों पर चलने वाले के साथ ही होता है,कम से कम हम तो ऐसा ही मानते हैं।संस्कार शब्द संस्कृति से बना है जो कि मनुष्य के जीवन को सुसंस्कृत और परिष्कृत करता जाता है,उसे बहुत लोगों से कुछ-कुछ अच्छा बनाता जाता है।ये कुछ-कुछ धीरे धीरे करके बहुत बड़ा हो जाता है और वो मनुष्य दूसरों से अलग नज़र आने लगता है।
     ये अलग वाला मनुष्य, कुछ कुछ खास तो ज़रूर करता है,पर वो हर मनुष्य को नज़र नहीं आता,या उसमें बहुत लोगों को कुछ ख़ास या अच्छा दिखाई नहीं पड़ता।इसके पीछे भी वही कारण है,'संस्कार',जी हाँ, अच्छाई को परखने के लिये भी अच्छी नज़र रखने वाला मनुष्य ही होना चाहिये तभी वो अच्छी बात को आत्मसात कर पायेगा।
    अब हम आपको आज की उस घटना की ओर ले चलते है।
   दोपहर के बारह बज रहे थे,सूर्य देवता अपनी प्रचंड अग्नि से मानो हर वस्तु को परिष्कृत कर के उसमे से मानो उसका सर्वश्रेष्ठ बाहर ले आना चाहते थे।हम एक चार पहियों वाली 15 किलो की अटैची और एक कपड़े का 8-10 किलो का बैग उस अटैची पर रखकर धीरे धीरे अपने घर के पास वाली गली में खुड़ दुड़ी सड़क पर चल रहे थे और उस अटैची को भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे,चूंकि तीन दिन से बुखार में पड़े थे और कुछ कमज़ोरी भी लग रही थी तो चाल में वो फुर्ती नहीं थी जो होनी चाहिए थी।
     तभी एक मधुर आवाज़ आकर हमारे कानो में अमृत घोल गई,"भैया,लाइये हम पहुँचा देते हैं,कहाँ तक ले जाना है?"इस आवाज को सुनकर पीछे देखा तो हमारे एक मित्र की पत्नी मुस्कुराती हुई नज़र आईं और हमें एक आत्मिक सुखः की अनुभूति करा गयीं।
हालांकि हमने उनसे सहयोग नहीं लिया परन्तु हमको ऎसा लगा कि हमारा सामान अपने गंतव्य तक बिना किसी मेहनत के पहुँच गया।वो मेरे साथ साथ बात करते हुए सड़क तक आइं जहाँ तक मुझे जाना था।
    उनका इतना कहना,हमें प्रसन्न कर गया।यद्यपि हमने सँकोचवश उनसे मदद नहीं ली फिर भी उनके इतना कह देने भर से हममें जो आत्मबल का संचार हुआ,उसने हमें हमारे गंतव्य तक पहुंचाने में मदद की।
   अब बात आती है संस्कारो वाली,क्या इस बीच हमको और लोगों ने नहीं देखा?क्या और कोई हमारा जानने वाला उस गली में नहीं था?क्या हमसे कम उम्र के लोग वहाँ पर नहीं थे जो हमसे ये कह सकते थे,या हमारे सामान को पहुंचा सकते थे?जी नहीं जिस किसी ने भी हमें देखा,उसमें वो संस्कार नहीं थे जो उस संभ्रांत महिला में थे,और ये संस्कार ही हैं जो एक मनुष्य को दूसरे मनुष्य से अलग दिखलाते हैं।वो महिला हमारे एक CA मित्र की पत्नी हैं,बहुत अच्छे संभ्रांत, भरे - पूरे सम्मानित ,पैसे वाले परिवार की हैं।
   अब हम आपको बताते हैं कि हमारे साथ ऎसा क्यों हुआ,क्योंकि हम भी इस तरह से दूसरों की मदद करते रहते है।हम भी जब अपने घर की सीढ़ियां चढ़ रहे होते हैं या हमें अपनी बिल्डिंग की कोई महिला गली में सामान उठाकर चलती हुई नजर आती है तो हम उनसे सामान लेकर उनके घर तक ,या सीढियां चढ़ा कर उनके फ्लैट तक पहुंचाने में मदद करते हैं और ये संस्कार हमें हमारे पिताजी के द्वारा बताई गई एक कहानी से अब से 40 साल पहले मिला था।वो कहानी कुछ ऐसे है:-
    40 साल पहले की जाड़े की सुबह,हमारे पिताजी कहीं बाहर से लौटकर आये थे।उनके पास एक चमड़े की अटैची थी और एक होल्डार था,(जिसमे बिस्तर रख कर लोग सफर पर जाया करते थे)खुन खुन जी की कोठी पर रिक्शे से उतर कर वहाँ पर मौजूद मजदूर लोग यात्रियों का सामान उठाकर उनके घर तक पहुँचा दिया करते थे।उस दिन सुबह सुबह कोई मजदूर नहीं आया था,तो हमारे पिताजी को लगा कि शायद समान उन्हें ही उठाना पड़ेगा,तभी वहाँ एक और रिक्शा आकर रुका और उसमें से उतरने वाले सज्जन पुरुष मेरे पिताजी की तरफ मुखातिब हुए और बोले "चाचाजी,अरे चलिए हम आपका समान घर तक छोड़ आते हैं।"
      ये संस्कार थे,उस समय के लड़कों के कि उन्होंने हमारे पिताजी की अटैची हाथ में ली और होल्डार सिर पर रखकर सुरंगी टोले तक छोड़कर आये जबकि उनका घर खुन खुन जी की कोठी के पीछे,बहोरन टोले में ही था।
    ये सज्जन पुरुष हमारे कोई रिश्तेदार नहीं थे,सिर्फ हमारे ताऊ के लड़के के दोस्त थे।परन्तु उस समय वो लखनऊ से बाहर सेंट्रल बैंक की किसी शाखा में बतौर मैनेजर कार्यरत थे,जहाँ से वो भी उस दिन लौटकर आ रहे थे।
    ये कहानी हमारे पिताजी ने हमें बताई थी,तबसे हम किसी की भी सहायता करने में गुरेज़ नहीं करते हैं,चाहें वो मेरा अपना हो,चाहें पराया।
    आजकल के बच्चों से मेरा ये विनम्र निवेदन है कि,अपनो से बड़ों की मदद करने में गुरेज़ मत करें,इससे आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा और आपका आत्मविश्वास एवम आत्मबल बढ़ेगा।
 धन्यवाद।

Tuesday, 1 August 2017

 GST में सर्विसेस टैक्स करेगा कमाल,भरेगा ख़ज़ाना,देश होगा मालामाल
    भारत सरकार को मनमोहन सिंह जी ने एक अलादीन का जादुई चिराग,सर्विस टैक्स के रूप में दिया था,जो धीरे धीरे अब अपना जलवा दिखाने लगा था,और अब एकदम से GST के अंतर्गत आने के बाद तो यह भारत सरकार का एक सपूत सिद्ध होगा,जो देश के सरकारी खजाने को अपने दम पर भरने का काम करेगा।
     2014 में जब मनमोहन सिंह जी की सरकार गयी,और मोदी जी आये,तो सर्विस  टैक्स 12 प्रतिशत था और उस टैक्स पर 2 प्रतिशत और 1प्रतिशत शिक्षा अधिभार औऱ उच्च शिक्षा अधिभार लगता था।मतलब 12.36 प्रतिशत सर्विस टैक्स की दर से टैक्स पड़ता था।
    वर्ष 2013-2014 में सर्विस टैक्स के रूप में 154778 रुपये सरकारी खजाने में आये थे।
    मोदी जी ने मई 2014 को प्रधानमंत्री का पद सम्भाला और अगले साल1 जून 2015 से सर्विस टैक्स को 15 प्रतिशत कर दिया गया,सारे अधिभारों सहित।इसका फायदा सरकार को मिला और जो सर्विस टैक्स 2014-2015 में 168132करोड़ था वो 2015-2016 में बढ़कर 209774 करोड़ हो गया,(करीब 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ।)
      यही सर्विस टैक्स 2016-2017 में बढ़कर 247500 करोड़ हो गया था।(करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी )
      अब जब सर्विसेज टैक्स 15 की बजाए 18 प्रतिशत हो जाएगा GST के रूप में तो 2017-2018 में टैक्स करीब करीब 40-45 प्रतिशत बढ़ेगा,पिछले साल के मुकाबले में, यानी,करीब 1लाख करोड़ रुपये बढ़कर 350000 करोड़ रुपये सिर्फ़ सर्विसेस टैक्स से आएगा।
       इससे आप लोग अंदाजा लगा सकते हो कि सर्विसेज पर टैक्स लगाकर मनमोहन सिंह जी ने कितना बड़ा काम सरकारी ख़ज़ानों को भरने के लिए कर दिया था।यह अप्रत्यक्ष कर धीरे धीरे प्रत्यक्ष कर से बड़ा रूप धारण करता जाएगा और एक दिन प्रत्यक्ष कर को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।     KC Sir
      
               सी ऐ जी ने मोदी जी के कमाऊ और प्रिय रेल मंत्री प्रभु जी की खोली पोल l
   146 गाड़ियों  के टिकट्स का दाम औसतन 33 प्रतिशत बढाने के बावजूद,एवं अन्य कई सेवाओं में बेतहासा दाम बढ़ाने के बावजूद,मोदी जी के प्रिय प्रभु ने भारतीय रेल में मिलने वाले खाने की गुड़वत्ता एवं मात्रा में की भारी गिरावट  खाना मनुष्यों के खाने लायक नहीं,lऐसा कहना है CAG का जो भारत सरकार का ही एक विभाग है l CAG ने रेल मंत्री के विभाग और कार्यों की समीक्षा में पाया बहुत बड़ा घपला l
     2014-2015 में जो 8000 शिकायतें खराब खाने को लेकर आयीं थीं,वो 2015-2016 में बढ़कर 11974,यानि करीब 16 शिकायतें रोजाना हो गयीं,वो भी तब जब,80 प्रतिशत लोग शिकायत कर नहीं पाते,या उनको पता नही होता है की शिकायत कहाँ और किससे करें l
     CAG ने 80 रेलगाड़ियों के 1975 यात्रियों से बातें की और 74 स्टेशनों पर 1800 यात्रियों से भी बातें करके यह सारे निष्कर्ष निकाले हैं l
  1.   सिर्फ 16 बेस किचन रेलवे परिसर में हैं,बाकी 115 बेस किचन स्टेशनों से बहुत दूरी पर हैं l
  2.   ट्रेन में पैनट्री कार में खाने को ढक कर नहीं रक्खा जाता है l
  3.   खाना बनाने में साफ पानी का प्रयोग नहीं होता है l
  4.   ट्रेन की रसोईघर में सफाई नहीं रहती है,वहाँ चूहे ,कीड़े मकोड़े और तिलचट्टे आदि घूमत रहते हैं l
  5.   यात्रियों को खाने की कीमत के बारे में ठीक से नही बताया जाता,भ्रमित किया जाता है l
  6.   खाने की मात्रा भी दर्शाई (बताई ) गयी मात्रा से कम होती है l
  7.   खाने का बिल देने का भी कोई प्रावधान नहीं है l
  8.   बाज़ार भाव से ज्यादा दाम वसूले जाते हैं l
  9.   प्रिन्ट दाम से ज्यादा दाम पैकेट बंद उत्पादों पर लिये जाते हैं l
 10.  डिब्बाबन्द और बोतलबन्द उत्पादों को एक्सपायरी डेट के बाद भी बेचा जाता है l
      CAG ने तो यहाँ तक कह दिया है कि"ट्रेनों एवं स्टेशनों पर मिलने वाला खाना,मनुष्यों के खाने के उपयुक्त नहीं है"l
      CAG की इस रिपोर्ट के आने के बाद भारत की जनता को यह पूछने का अधिकार तो मिल ही जाता है कि क्या प्रभु जी को सिर्फ रेलवे की आमदनी बढ़ाने के लिए रक्खा गया है,क्या हर चीज में हर काम में दाम बढ़ना ही उनका ध्येय है?
       क्या IRCTC के द्वारा किये जा रहे ग़लत कार्य-कलापों के ऊपर निगाह रखना प्रभु जी के कार्यों में नहीं शामिल है?
       क्या भारत की निरीह जनता को प्रभु जी ने सिर्फ और सिर्फ एक दुधारू गाय के रूप में ही जाना है और उन्हें एक जानवर से भी बद्तर समझा है ,जो इस तरह का व्यहार वो भारतीय रेलवे के द्वारा करवा रहें है?क्या जवाब मिलेगा प्रभू?  KC Sir

      
 

Monday, 19 September 2016


मोदी जी के प्रिय प्रभू ने काला - बाजारी को पहनाया कानूनी चोला।
     जी हाँ,सुनने में कुछ अटपटा ज़रूर लग रहा है पर है सोलह-आने सच। प्रभुजी ने ऐसा कानून बना दिया है कि काला- बाजारी भी करो और वो भी कानूनन, यानि कानून आप का कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा।आप सोच रहे होंगे क्या बहकी बहकी बातें कर रहे हैं।
     अरे साब हम बिलकुल सही कह रहे हैं। अब बस आपको अपनी कालाबाजारी को एक नया नाम(सर्ज प्राइसिंग) देना पड़ेगा,और बस आप धड़ल्ले से कालाबाजारी कीजिये किसी की हिम्मत नहीं होगी जो रोक सके,आखिर मोदी जी के प्रिय प्रभू जी ने इस सिद्धांत को कानूनी जामा जो पहना दिया है।
     प्रभुजी कहते हैं कि यदि आपके पास कोई वस्तु 100 है और वो आप 1000रूपए प्रति वस्तु बेचना तय करते है,लेकिन आपको लगता है कि खरीदने वाले तो100 से बहुत ज्यादा हैं तो आप उस वस्तु को (उभरती दर)के अंतर्गत 1000 रूपए से ज्यादा,1500 रूपए में भी कानूनन बेच सकते है,और 1500 रूपए लेना अपराध नहीं होगा,जो पहले अपराध  (कालाबाजारी)माना जाता था।
      पहले हज़ारों लोग वस्तुओं की कालाबाजारी करने के जुर्म में जेलों की हवा खा चुके है। परन्तु अब इस नये कानून के अंतर्गत आकर कालाबाजारी भी सफ़ेद चकाचक ईमानदार व्यवसाय में परवर्तित हो जायेगी।
      जब सरकारी उपक्रम प्रभु जी की रेल में इस पुराने जमाने में कालाबाजारी कही जाने वाली धारणा को नया नाम देकर उसका शुद्धिकरण कर दिया गया है तो फिर किसकी मज़ाल है जो इस कालाबाजारी को काला बाजारी कहने की हिम्मत करेगा,यह तो( सर्ज प्राइसिंग) है,और इस नए नामकरण की आड़ में भारतीय गरीब जनता को लूटने के नये रास्ते खोज लिए हैं इस केंद्र सरकार ने।
        शायद आप में से बहुत सारे लोगों को यह पता भी नहीं होगा कि इस नए क़ानून की आड़ लेकर भारत सरकार की भारतीय रेल के करता धरता श्रीमान प्रभुजी ने भारत में चलने वाली 146 रेलगाड़ियों का किराया 50% तक बढाने का  इंतजाम कर लिया है और वो पिछले हफ्ते से लागू भी हो गया है।
      यह बढ़ा हुआ किराया गरीब जनता से ही वसूला जायेगा, क्योंकि अमीर लोगों की श्रेणी ,यानि की ए सी 1st जैसी श्रेणी में जिसमे अमीर लोग चलते हैं ये कालाबाजारी नहीं की जाएगी। देखिये प्रभुजी कितना ख्याल रखते हैं अमीर लोगों का कि उनपर ज्यादा बोझ न बढे।
       सरकारी रेल का भी कितना ध्यान दिया है प्रभुजी ने कि एक ही झटके में 50% तक किराया बढ़ा दिया और आगे अन्य गाड़ियों में भी ऐसा ही करेंगे यह भी बता दिया है।
      अब आप सोचिये कहाँ लालूजी जो बेचारे यह सोच - सोच कर ही खुश थे कि उन्होंने रेलमंत्री रहते हुए किराया नहीं बढाया ,और कहाँ हमारे प्रभुजी जो साल में कई कई बार अलग अलग तरीकों का इस्तेमाल करके किराया बढ़ाते रहते है,यकीन न हो तो हम याद दिलायें कि पिछले डेढ़ साल में कितनी बार कितनी तरह से किराया बढाया है।
      अब इस कानून का फायदा रेल विभाग के साथ साथ और कई विभागों में होगा,परन्तु हम यहाँ पर अभी सिर्फ रेल विभाग की ही बात करते है।
      गाड़ी में लगी हुई भोजन यान में यदि खाने की थाली 300 हैं और एक का दाम 100 रुपय है और मेनेजर देखता है की थाली खरीदने वाले तो500 हैं तो वो फ़ोरन थाली का दाम 150 रूपए कर देगा और प्रभु जी उसको मना नहीं कर सकेंगे न ही उसे कालाबाजारी करने के जुर्म में गिरफ्तार करवा सकेंगे,क्योंकि वो वही कर रहा है जो प्रभु जी खुद कर रहे हैं ट्रेन में किराये को लेकर। और जब आप सर्ज प्राइसिंग का हवाला देकर कानूनन बच सकते हो तो वही कानून तो वो भी इस्तेमाल कर रहा है।
      यही सर्ज प्राइसिंग का हवाला देकर हर क्षेत्र के व्यवसायी काला बाजारी करेंगे और सरकार उनको रोक नहीं पायेगी क्योंकि जब सरकारी उपक्रम कोई नाजायज काम को ,कानून की नई परिभाषा गढ़ कर कानून के अंतर्गत ले आएगा तो उस कानून का उपयोग तो दूसरे भी करेंगे और इस प्रकार पूरे भारत वर्ष में कालाबाजारी एक भयंकर परन्तु कानूनी रूप लेकर तांडव करती नज़र आएगी और कोई भी फिर उसको रोक नहीं पायेगा।
      अन्त में हमें प्रभुजी से एक ही निवेदन करना है कि जो चिंगारी आप ने चीजों और वस्तुओं की कमी की आड़ लेकर "सर्ज प्राइसिंग"के रूप में लगाईं है यह चिंगारी एक दिन भारत के संसाधनों को कालाबाजारी की आग में ऐसे झोक देगी कि फिर आप क्या मोदीजी भी कुछ नहीं कर पायेंगे और पूरा भारत आप की लगाईं इस आग में झुलसता जायेगा। तब आप सिर्फ अफ़सोस ही कर पाएंगे।
       बाकी आपकी मर्जी आखिर आप अपने विभाग के सर्वेसर्वा हैं और लोग कहते भी हैं कि मोदी जी के काबिल मंत्रियों में आपकी गिनती होती है। धन्यवाद्।    KC Sir
    
    

Friday, 22 April 2016


                       आज  के  युवा  कब  करें  शादी  और  कब  बच्चे  हों

          आज के समय का बहुत ही महत्वपूर्ण परन्तु युवक युवतियों के द्वारा ध्यान न दिया जाने वाला विषय है "कब शादी करें एवं कब बच्चे हों"
          आज से तीस साल पहले जब हमारी शादी हुई थी तब लड़के लड़कियों की शादी की उम्र 22 से25 साल हुआ करती थी,और उससे 30-35साल पहले जब हमारे पिताजी की शादी हुई थी उस समय शादी की उम्र 18 से 21 साल हुआ करती थी।
          परन्तु अब जब हमारे बच्चों की शादी हुई तो शादी की उम्र बढ़ कर 26 से29 साल हो चुकी है।
          इन उदाहरणों को देखने से पता चलता है कि,2015-16 में जो शादी हुई और 1985-86 में जो शादी हुई ,दोनों शादी के समय लड़के लड़की की उम्र बढ़ कर 4-5 साल ज्यादा हो चुकी थी और जो शादी 1950-55 में हुई थी उस समय से शादी की उम्र 8से 10साल बढ़ कर 26 से29 वर्ष हो चुकी है।
          इन बातों से यह निष्कर्ष निकलता है कि,पिछली तीन पीढ़ियों में शादी की उम्र बढ़ कर 26 से29 वर्ष हो चुकी है जो अगली पीढ़ी तक बढ़ कर 30 से33 वर्ष अवस्य हो जाएगी। इसके पीछे कई कारण हैं,जिनके अन्दर हम इस लेख में नहीं जायेंगे,आगे फिर कभी इस विषय पर बात करेंगें। 

                    अब हम इस लेख के मूल प्रश्न पर आते हैं,कि कब शादी करें और कब बच्चे हो?

          इस प्रश्न के पहले भाग का उत्तर तो हमें मिल चुका है कि आज कल जो शादी हो रही है,मेरा मतलब 2015 से 2020 तक जो शादी होंगी उनके बच्चों की शादी के समय उम्र 30 से 33 साल होगी।

                अब प्रश्न ये है कि आजकल जो शादियाँ हो रही हैं उनको बच्चे कब पैदा करने चाहिए?

          आजकल के बच्चों की सोच है कि हम शादी के 4-5 साल बाद बच्चे की बात करेंगे,क्या यह सोच उचित है? क्या उन्होंने सोच समझ कर यह फैसला लिया है? क्या उन्होंने यह सोचा है की आज उनकी उम्र क्या है? क्या उन्होंने यह सोचा है कि जब 5 साल बाद उनके बच्चे होंगे तो उसके 30-35 साल बाद जब उनको जिन्दगी में व्यवस्थित करना होगा और उनकी शादी करनी होगी तो,आज के इन नए शादीशुदा बच्चों की उम्र क्या हो चुकी होगी? क्या यह आज के बच्चे कल के बच्चों के अभिभावक कार्यरत भी होंगे? क्या वो इस स्थिति में भी होंगें कि वो अपनी उस ज़रूरी जिम्मेदारी का दायित्व भी निभा पाएंगे? अगर वो सेवानिवृत हो चुके होंगे तो क्या उनके पास पर्याप्त धन होगा जो वो अपने बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकेंगें? और क्या उसके लिए उनके पास उम्र बची होगी? क्या उनका शरीर उनका साथ देने की स्थिति में होगा ? क्योंकि उस समय उनकी उम्र 63 से 67 साल हो चुकी होगी। क्या उम्र के उस पड़ाव पर वो बच्चों के बच्चो के प्रति अपना कोई कर्त्तव्य निभा पाएंगे? और क्या उस उम्र में वो अपने हमराही के प्रति अपनी जिम्मेदारी और अपने बुढ़ापे का ख्याल रख पाएंगे?

                                 क्या 65 से 70 साल की उम्र बच्चो की शादी करने की होती है? 


        निश्चित नहीं,तो क्या हमें अपने बच्चों को यह नहीं समझाना चाहिए कि,यदि उनकी उम्र 27 से30 साल हो चुकी है तो उन्हें फ़ौरन बच्चों के बारे में सोचना शुरू कर देना चाहिए जिससे अपने सेवानिवृत होने से पहले वो अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर काबिल बना कर उनकी शादी कराकर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर सकें।जो कि आज 30 की उम्र में बच्चा होने पर अभिभावक की 63 से 65 साल की उम्र पर उसकी शादी सम्भव हो पायेगी।
        हालाकिं हमें उम्मीद कम ही है कि आजकल की पढ़ी लिखी पौध जो अपनी सोच के आगे बुजुर्गों के अनुभव और विचारों को नगण्य मानती है, इस लेख में लिखे एवं बताये हुए विचारों को मन लगाकर पढेगी और मंथन करेगी तथा इसकी बातों की गहराई में जाकर विचार करेगी,परन्तु अगर ऐसा करेगी तो उसे अवस्य लाभ होगा और वो इसपर अमल करके अपने आने वाले कल और आने वाले भविष्य के बच्चों के कल को सुन्दर और सुरक्षित बना  सकेगी। मेरी शुभकामनाये हमेशा बच्चों के साथ हैं। सब बच्चों एवं बड़ों के विचार आमंत्रित हैं, खुलकर टिप्पड़ी करें। धन्यवाद्।                                                             KC Sir