Monday, 29 June 2015




                     धीरे धीरे मरती लखनऊ की " पहले आप-पहले आप " वाली तहजीब 
        लखनऊ  नवाबों के जमाने से अपनी इस तहजीब के लिए जाना जाता रहा है| आज तक बहुत सारे चलचित्रों में लखनऊ की इस तहजीब का जिक्र होता रहा है, बॉबी फिल्म के तो एक गाने में भी इस तहजीब का जिक्र आया था,जिसमे इसके कारण नवाब साहेब की गाड़ी छूट गयी थी|
         परन्तु कहते हुए दुःख होता है की,पिछले 45 वर्षो से लखनऊ में प्रवास के दौरान मैं निरंतर इस तहजीब को तिल-तिल मरते हुए देख रहा हूँ,और शायद अब "पहले आप " के बेटे ने जन्म ले लिया है जो बड़ा बिगड़ा हुआ बेटा है , जिसका नाम मै आपको आगे बताऊंगा|
          1970 से 1980 के दशक में पहले आप कहते हुए एक दूसरे को सम्मान देते हुए फिर भी काफ़ी लोग मिल जाते थे, ऐसा नहीं था की सिर्फ उम्र में छोटे लोग ही अपने से बड़ी उम्र के लोगों को यह सम्मान देते थे परन्तु उम्र में बड़े लोग अपने से छोटे लोगों को भी "पहले आप" कह कर सम्मान देते नज़र आ जाते थे| 
           1980 से 1990 के दशक में लखनऊ शहर में कुछ नयी रिहायसी कालोनी बननी शुरू हुई,पुराने लखनऊ से कुछ परिवार वहां जाकर बसे एवं कुछ परिवार लखनऊ से बाहर के भी आकर यहाँ बसना शुरू हो गए|
            1990 से 2000 के दशक में इस प्रक्रिया ने जोर पकड़ना शुरू किया, क्योंकि लखनऊ चारों दिशाओं में तेजी के साथ बढ़ने लगा, क्योंकि राजधानी होने की वजह से सरकारी गैरसरकारी प्रतिष्ठानों के कार्यालय तेजी से खुल रहे थे, उनमे काम करनेवालों की वजह से लखनऊ की आबादी तेजी से बढ़ रही थी, ये वो आबादी थी जो मूलरूप से लखनऊ की रहनेवाली नहीं थी |
            लखनऊ के आस पास के शहरों तथा कुछ बड़े शहरों से लोग आ-आ कर यहाँ बसने लगे,ये लोग नयी बसी कालोनियो में ही ज्यादातर रहने लगे ,लखनऊ में नये बसे इन लोगों का संपर्क पुराने लखनऊ में रहने वाले लोगों से ज्यादा नहीं होता था ,या आप कह सकते है की न के बराबर होता था|
              लखनऊ में दूसरी जगहों, शहरों से आयी हुई जनता एवं लखनऊ की पुरानी तहजीब के साथ जी रही जनता का एक दूसरे से अधिक संपर्क में न रह पाना, और बाहर से आने वाली जनता की आबादी का, लखनऊ की अपनी बढ़ती हुई आबादी, से भी आगे निकल जाना, भी एक कारण है कि लखनऊ की वो पुरानी तहजीब, हम पुराने लखनऊ के पुराने वाशिंदे हमारे शहर में नये आये लोगों को सिखा नहीं सके |
              सन 2000 के बाद तो आबादी बढ़ने का सिलसिला इतनी तेजी से बढ़ा की,लखनऊ के पुराने वाशिंदे भी नये आये लोगों के रंग में रंगने लगे क्योंकि बड़े बूढ़े लोग तो धीरे धीरे अल्लाह को प्यारे हो गये,और नयी पौध अपने बुजुर्गों के पुराने संस्कारों को संजोकर रख पाने में विफल हो गयी,जिसके पीछे बहुत से कारण हैं उन कारणों को विस्तार से फिर कभी बताएंगें|
             अब तो शायद आप किसी से रेलवे क्रासिंग पर ये कह देंगें कि "पहले आप" तो शायद वो आपको पागल समझ के पहले निकल जायेगा और आप देर तक वहां खड़े होकर सोचते रहेंगे,क्योंकि आजकल लखनऊ के लोग  "पहले हम " में विश्वास करते हैं चाहे उसके लिए उन्हें लड़ाई झगड़ा ही क्यों न करना पड़े|
              "पहले हम " ही "पहले आप" का बेटा है जो अब लखनऊ की जनता के दिलोदिमाग पर इस कदर छाया हुआ है कि इसकी वजह से रोज सैकड़ों एक्सीडेंट हो रहे है, लड़ाईयां हो रही है,कोई एक दूसरे को अपने से आगे जाते हुए देख नहीं सकता है, तो वो "पहले आप "क्या कहेगा?
               जिसने " पहले आप" का मंज़र देखा है और उसे अब "पहले हम" के वीभत्स दर्शन करने पड़ रहे हैं, ऐसे चंद बचे हुए पुराने लखनऊ के वाशिंदों से कभी मिलना हो जाये तो आप उन्ही से पूछना कि आज का लखनऊ उन्हें कैसा लगता है, क्या उनका दिल अब लखनऊ में रहने को करता है?
           कभी कभी सोचते हैं कि क्या " पहले आप" वाले पुराने लखनऊ को फिर से जी पाने का मौका मिलेगा? क्या फिर से लखनऊ में एक दूसरे के प्रति प्रेम और आदर का भाव देखने को मिलेगा? या फिर वो सब एक सपना बन कर रह गया है|
           कहते हैं उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए,और आज कल की नयी पौध सबको बहुत सिखाती है कि " बी-पॉजिटिव "  तो क्या हम इनसे यह उम्मीद लगा कर रक्खें कि लखनऊ में एक बार फिर   "पहले आप"  वाले दिन आयेंगें|
           आप बतायें आप इस बारे में क्या सोचते हैं|
             
    KC Sir              [K.C.MEHROTRA]
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Wednesday, 24 June 2015

      अखिलेश सरकार का एक अद्बभुत फैसला,जो बहुतो को आत्महत्या करने को प्रेरित करता है
      उत्तर प्रदेश के एक पत्रकार जिसने आत्महत्या की या उसकी हत्या कर दी गयी,अभी पता नहीं है,पुलिस केस हो चुका है,तफतीस जारी है,अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है की तफतीस में क्या निकल के आयेगा|
      पत्रकार की तरफ से जो दलील दी गयी एवं जो मरते समय की मजिस्ट्रेट के सामने दी हुई गवाही ,सोशल मीडिया पर पत्रकार के द्वारा लिखा हुआ बयान जिसमे अखिलेश जी के मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ मंत्री जी का नाम लिया गया था,ऐसे बहुत सी बातें हैं जो साफ़ इशारा कर रही हैं की पत्रकार की हत्या में मंत्रीजी का हाथ हो सकता है,जिसमे सबसे बड़ी बात"मरते समय मजिस्ट्रेट को दिया गया बयान है "
       पत्रकार के परिजनों ने अनशन किया की सीबीआई के द्वारा जांच होनी चाहिए,जिसको कि उत्तर प्रदेश सरकार ने नहीं माना एवं पत्रकार के परिजनों को अखिलेश जी ने मिलने के लिए बुला लिया |
       सरकार की तरफ से अभी तक यही कहा जा रहा है कि फोरेंसिक रिपोर्ट से शुरूआती तौर पर जो निकल कर सामने आ रहा है,उससे लगता है की पत्रकार ने अपने आप को आग स्वयं ही लगाईं थी|
        जब पत्रकार गुहार लगा रहा था की उसको मंत्री जी ने धमकी दी है,उसे जान का खतरा है,तब तो प्रदेश की सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया,अपने मंत्रीजी से कोई पूछताछ नहीं करी,मरते समय के बयान में मंत्रीजी का नाम आया तो भी शासन हरकत में नहीं आया,परन्तु जब पत्रकार के परिजनों ने अनशन किया तो उनको राजधानी बुला लिया गया|                                                                                                                  अब आता है ख़ास मुद्दा  
       जब अभी तफतीस जारी है,कुछ तय नहीं हुआ है,कि पत्रकार ने स्वयं खुद को आग लगाईं या उसको आग लगाईं गयी,तो पत्रकार के परिजनों को 30 लाख रूपए देना और दो परिजनों को सरकारी नौकरिया देने का वादा करने का क्या ओचित्य है?
       यह तो दिखाई दे रहा है की यह पत्रकार की मौत के मुआवजे के रूप में उसके परिजनों को सौगात दी गयी है|
                                             सरकार के इस कदम से दो प्रश्न उत्पन्न होते हैं|
1.क्या यह मुआवजा पत्रकार की हत्या हो गयी है उसके लिए है? या 
2.क्या यह मुआवजा पत्रकार ने आत्महत्या की है उसके लिए है?
         अगर हत्या होने का मुआवजा है,तो हत्यारा पुलिस की हिरासत में क्यों नहीं है छुट्टा क्यों घूम रहा है?
         अगर आत्महत्या करने का मुआवजा है तो क्या सरकार हर आत्महत्या करनेवाले को अब से 30लाख रूपए और 2 परिजनों को सरकारी नौकरियां देगी?
          सरकार की उस दलील को अगर ध्यान में रक्खें,की सुरुआती फ़ोरेंसिक जांच में पता चला है की पत्रकार ने आत्महत्या की है,और सरकार की पुलिस के द्वारा मंत्रीजी को हिरासत में न लेना,इन दोनों बातों से तो यही लगता है की यह मुआवजा पत्रकार के परिजनों को पत्रकार द्वारा आत्महत्या करने के उपलक्ष्य में ही मिला है|
                                                               सरकार से हमारा प्रश्न
       श्रीमान अखिलेशजी क्या आपका यह कदम प्रदेश की जनता को आत्महत्या की ओर प्रेरित नहीं करता है?
       70% गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही जनता के सामने 30 लाख रूपए और 2 बच्चों को सरकारी नौकरी मिलने का प्रलोभन क्या प्रदेश की जनता को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित नहीं करेगा?
        हमारे बाद हमारे बीबी बच्चे मजे में जिंदगी यापन करेंगे ,क्या यह लालच एक गरीब को आत्महत्या करने को नहीं उकसाएगा?
        और अगर भगवान् न करे यह सोच गरीब के दिल में बैठ गयी तो आने वाले समय में आपको सरकारी ख़जाने का मुह खोल के रखना पड़ेगा,तब कहाँ से लायेंगे करोड़ों रूपए और लाखों सरकारी नौकरियां ?
         अभी भी समय है ,इस मुआवजे को आत्महत्या नहीं हत्या के मुआवजे में बदलने का प्रयत्न करिए और केस को सीबीआई के हाथ में दे दीजिये ,जिससे प्रदेश की जनता आपकी जयजयकार करे और ,आप लाखों लोगों की आत्महत्या करने में मदद करने के पाप से भी बच जायें|               धन्यवाद.
   KC Sir              [K.C.MEHROTRA]
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Monday, 22 June 2015

     क्या बाप की गलतियों से अगर बेटा सबक न ले,तो नुकसान जनता का होता है?
       अभी तक आप लोंगों ने जो कहावत सुनी थी,उसके हिसाब से जो इंसान समझदार होता है वो अपने बुजुर्गों की गलतियों से सबक लेता  हैं और वह गलती नहीं करता हैं जो उनके पिताजी ने की थी और उससे नुक्सान हुआ था|
       यहाँ पर हम आपको एक ऐसे पुत्र की बात बताने जा रहे हैं जिसके पिता ने आज से 10-15 साल पहले एक गलती की थी,जिससे उत्तर प्रदेश सरकार को 20-25 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ था.उस गलती को सुधारने में फिर करोड़ों रूपए खर्च हुए|
       उसी पिता के पुत्र के द्वारा आज फिर से वही गलती दोहराई जा रही है,फिर से करोड़ों रूपए खर्च हो रहें हैं,और जिस काम के लिए यह पैसा खर्च हो रहा है,उस कार्य के लिए इस्तेमाल न तब हुआ था न अब होगा|
      इस कहानी में पिता हैं माननीय मुलायम सिंह जी यादव एवं पुत्र की भूमिका में हैं माननीय अखिलेश जी यादव,हमारे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी|
      मुलायम सिंह जी जब मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने गोमती नगर में 4-5 किलोमीटर लम्बा साईकिल ट्रैक बनवाया था,सड़क के दोनों तरफ,लोहे की मजबूत रेलिंग और खूबसूरत प्रकाश व्यवस्था के साथ,उस समय कहते हैं 20-25 करोड़ रूपए सरकारी खजाने से खर्च किये गए थे|
       दस -पंद्रह साल तक उस साईकिल -ट्रैक पर इतनी साईकिल भी नहीं चली की एक साईकिल प्रतिदिन का भी औसत निकल सके|यानि की जनता के पैसे का बंटाधार हो गया,या दुरूपयोग किया गया|अगर उस समय इस पैसे का सदुपयोग किया जाता तो शायद तीन-चार ओवर ब्रिज लखनऊ में उस समय बन चुके होते|
      जिस समय मुलायम जी ने साइकिल ट्रैक बनाया था उस जगह पर कुछ नहीं बना था,मतलब सड़क के किनारे की जगह खाली थी|
      10-15 साल बाद जब देखा गया की वो साईकिल ट्रैक किसी काम नहीं आ रहा है तो सरकार ने उसे तुडवा दिया,जिसमे फिर करोड़ों रुपयों का खर्च आया,जो पब्लिक की गाढ़ी कमाई से दिया जाता है|
    ये तो बात हुई पिता की,अब पुत्र क्या करने जा रहा है वो समझिये और उसका मुल्यांकन कीजिये
      माननीय अखिलेश जी अपने पिता की गलती से सबक न लेते हुए,उन्ही के पदचिन्हों पर चलने का प्रयास शुरू कर चुके हैं,बल्कि पिता से एक कदम आगे|पिता जी ने तो खाली ज़मीन पर साइकिल -ट्रैक बनवाया था, परन्तु पुत्र मज़बूत बने हुए फुटपाथों एवं खूबसूरत रेलिंग्स को तुड़वाकर साइकिल ट्रैक बनवा रहे हैं,वोह भी हज़रात गंज जैसी जगह पर, जहाँ साइकिल चलती कम ही नज़र आती है,एवं जहाँ पर इतनी जगह नहीं है कि लगातार साइकिल -ट्रैक बन सके,20 मीटर साइकिल ट्रैक, फिर सड़क,फिर फुटपाथ,क्या साइकिल वाले ऐसे साइकिल चलायेंगें?आप लोग खुद हजरतगंज जा कर पब्लिक के पैसे की बर्बादी होते हुए देख सकते हैं|
       जो पैसा इस कार्य में बर्बाद किया जा रहा है,उससे लखनऊ भर में बहुत सारी सड़के, फुटपाथ,गलियां इत्यादि बनवाई जा सकती है|जिस जनता ने अखिलेश जी को मुख्यमंत्री बनवाया है वो उन्हें समझाने की कोशिश करें,और भगवान् से प्रार्थना करें की वो उन्हें सदबुद्धि दे जिससे वो यह कार्य करवाना बंद कर दें|
       शायद पुत्र पिता की गलतियों से सबक इसलिये भी नहीं ले रहा है,क्योंकि नुक्सान न तो पिता के पैसों का हुआ था, और नुक्सान न ही पुत्र के पैसों का होने जा रहा है|नुक्सान तो बेचारी जनता के पैसों का हो रहा है|उन दोनों का तो..........
       अंत में अखिलेश जी मेरी आपसे करबद्ध प्रार्थना है की,कृपया पिताजी से हुई भूल का संज्ञान लेते हुए,पब्लिक के पैसे का दुरूपयोग बंद कीजिये|
       धन्यवाद्|
   KC Sir              [K.C.MEHROTRA]
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