अखिलेश सरकार का एक अद्बभुत फैसला,जो बहुतो को आत्महत्या करने को प्रेरित करता है
उत्तर प्रदेश के एक पत्रकार जिसने आत्महत्या की या उसकी हत्या कर दी गयी,अभी पता नहीं है,पुलिस केस हो चुका है,तफतीस जारी है,अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है की तफतीस में क्या निकल के आयेगा|
पत्रकार की तरफ से जो दलील दी गयी एवं जो मरते समय की मजिस्ट्रेट के सामने दी हुई गवाही ,सोशल मीडिया पर पत्रकार के द्वारा लिखा हुआ बयान जिसमे अखिलेश जी के मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ मंत्री जी का नाम लिया गया था,ऐसे बहुत सी बातें हैं जो साफ़ इशारा कर रही हैं की पत्रकार की हत्या में मंत्रीजी का हाथ हो सकता है,जिसमे सबसे बड़ी बात"मरते समय मजिस्ट्रेट को दिया गया बयान है "
पत्रकार के परिजनों ने अनशन किया की सीबीआई के द्वारा जांच होनी चाहिए,जिसको कि उत्तर प्रदेश सरकार ने नहीं माना एवं पत्रकार के परिजनों को अखिलेश जी ने मिलने के लिए बुला लिया |
सरकार की तरफ से अभी तक यही कहा जा रहा है कि फोरेंसिक रिपोर्ट से शुरूआती तौर पर जो निकल कर सामने आ रहा है,उससे लगता है की पत्रकार ने अपने आप को आग स्वयं ही लगाईं थी|
जब पत्रकार गुहार लगा रहा था की उसको मंत्री जी ने धमकी दी है,उसे जान का खतरा है,तब तो प्रदेश की सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया,अपने मंत्रीजी से कोई पूछताछ नहीं करी,मरते समय के बयान में मंत्रीजी का नाम आया तो भी शासन हरकत में नहीं आया,परन्तु जब पत्रकार के परिजनों ने अनशन किया तो उनको राजधानी बुला लिया गया| अब आता है ख़ास मुद्दा
जब अभी तफतीस जारी है,कुछ तय नहीं हुआ है,कि पत्रकार ने स्वयं खुद को आग लगाईं या उसको आग लगाईं गयी,तो पत्रकार के परिजनों को 30 लाख रूपए देना और दो परिजनों को सरकारी नौकरिया देने का वादा करने का क्या ओचित्य है?
यह तो दिखाई दे रहा है की यह पत्रकार की मौत के मुआवजे के रूप में उसके परिजनों को सौगात दी गयी है|
सरकार के इस कदम से दो प्रश्न उत्पन्न होते हैं|
1.क्या यह मुआवजा पत्रकार की हत्या हो गयी है उसके लिए है? या
2.क्या यह मुआवजा पत्रकार ने आत्महत्या की है उसके लिए है?
अगर हत्या होने का मुआवजा है,तो हत्यारा पुलिस की हिरासत में क्यों नहीं है छुट्टा क्यों घूम रहा है?
अगर आत्महत्या करने का मुआवजा है तो क्या सरकार हर आत्महत्या करनेवाले को अब से 30लाख रूपए और 2 परिजनों को सरकारी नौकरियां देगी?
सरकार की उस दलील को अगर ध्यान में रक्खें,की सुरुआती फ़ोरेंसिक जांच में पता चला है की पत्रकार ने आत्महत्या की है,और सरकार की पुलिस के द्वारा मंत्रीजी को हिरासत में न लेना,इन दोनों बातों से तो यही लगता है की यह मुआवजा पत्रकार के परिजनों को पत्रकार द्वारा आत्महत्या करने के उपलक्ष्य में ही मिला है|
सरकार से हमारा प्रश्न
श्रीमान अखिलेशजी क्या आपका यह कदम प्रदेश की जनता को आत्महत्या की ओर प्रेरित नहीं करता है?
70% गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही जनता के सामने 30 लाख रूपए और 2 बच्चों को सरकारी नौकरी मिलने का प्रलोभन क्या प्रदेश की जनता को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित नहीं करेगा?
हमारे बाद हमारे बीबी बच्चे मजे में जिंदगी यापन करेंगे ,क्या यह लालच एक गरीब को आत्महत्या करने को नहीं उकसाएगा?
और अगर भगवान् न करे यह सोच गरीब के दिल में बैठ गयी तो आने वाले समय में आपको सरकारी ख़जाने का मुह खोल के रखना पड़ेगा,तब कहाँ से लायेंगे करोड़ों रूपए और लाखों सरकारी नौकरियां ?
अभी भी समय है ,इस मुआवजे को आत्महत्या नहीं हत्या के मुआवजे में बदलने का प्रयत्न करिए और केस को सीबीआई के हाथ में दे दीजिये ,जिससे प्रदेश की जनता आपकी जयजयकार करे और ,आप लाखों लोगों की आत्महत्या करने में मदद करने के पाप से भी बच जायें| धन्यवाद.
KC Sir [K.C.MEHROTRA]
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