Monday, 19 September 2016


मोदी जी के प्रिय प्रभू ने काला - बाजारी को पहनाया कानूनी चोला।
     जी हाँ,सुनने में कुछ अटपटा ज़रूर लग रहा है पर है सोलह-आने सच। प्रभुजी ने ऐसा कानून बना दिया है कि काला- बाजारी भी करो और वो भी कानूनन, यानि कानून आप का कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा।आप सोच रहे होंगे क्या बहकी बहकी बातें कर रहे हैं।
     अरे साब हम बिलकुल सही कह रहे हैं। अब बस आपको अपनी कालाबाजारी को एक नया नाम(सर्ज प्राइसिंग) देना पड़ेगा,और बस आप धड़ल्ले से कालाबाजारी कीजिये किसी की हिम्मत नहीं होगी जो रोक सके,आखिर मोदी जी के प्रिय प्रभू जी ने इस सिद्धांत को कानूनी जामा जो पहना दिया है।
     प्रभुजी कहते हैं कि यदि आपके पास कोई वस्तु 100 है और वो आप 1000रूपए प्रति वस्तु बेचना तय करते है,लेकिन आपको लगता है कि खरीदने वाले तो100 से बहुत ज्यादा हैं तो आप उस वस्तु को (उभरती दर)के अंतर्गत 1000 रूपए से ज्यादा,1500 रूपए में भी कानूनन बेच सकते है,और 1500 रूपए लेना अपराध नहीं होगा,जो पहले अपराध  (कालाबाजारी)माना जाता था।
      पहले हज़ारों लोग वस्तुओं की कालाबाजारी करने के जुर्म में जेलों की हवा खा चुके है। परन्तु अब इस नये कानून के अंतर्गत आकर कालाबाजारी भी सफ़ेद चकाचक ईमानदार व्यवसाय में परवर्तित हो जायेगी।
      जब सरकारी उपक्रम प्रभु जी की रेल में इस पुराने जमाने में कालाबाजारी कही जाने वाली धारणा को नया नाम देकर उसका शुद्धिकरण कर दिया गया है तो फिर किसकी मज़ाल है जो इस कालाबाजारी को काला बाजारी कहने की हिम्मत करेगा,यह तो( सर्ज प्राइसिंग) है,और इस नए नामकरण की आड़ में भारतीय गरीब जनता को लूटने के नये रास्ते खोज लिए हैं इस केंद्र सरकार ने।
        शायद आप में से बहुत सारे लोगों को यह पता भी नहीं होगा कि इस नए क़ानून की आड़ लेकर भारत सरकार की भारतीय रेल के करता धरता श्रीमान प्रभुजी ने भारत में चलने वाली 146 रेलगाड़ियों का किराया 50% तक बढाने का  इंतजाम कर लिया है और वो पिछले हफ्ते से लागू भी हो गया है।
      यह बढ़ा हुआ किराया गरीब जनता से ही वसूला जायेगा, क्योंकि अमीर लोगों की श्रेणी ,यानि की ए सी 1st जैसी श्रेणी में जिसमे अमीर लोग चलते हैं ये कालाबाजारी नहीं की जाएगी। देखिये प्रभुजी कितना ख्याल रखते हैं अमीर लोगों का कि उनपर ज्यादा बोझ न बढे।
       सरकारी रेल का भी कितना ध्यान दिया है प्रभुजी ने कि एक ही झटके में 50% तक किराया बढ़ा दिया और आगे अन्य गाड़ियों में भी ऐसा ही करेंगे यह भी बता दिया है।
      अब आप सोचिये कहाँ लालूजी जो बेचारे यह सोच - सोच कर ही खुश थे कि उन्होंने रेलमंत्री रहते हुए किराया नहीं बढाया ,और कहाँ हमारे प्रभुजी जो साल में कई कई बार अलग अलग तरीकों का इस्तेमाल करके किराया बढ़ाते रहते है,यकीन न हो तो हम याद दिलायें कि पिछले डेढ़ साल में कितनी बार कितनी तरह से किराया बढाया है।
      अब इस कानून का फायदा रेल विभाग के साथ साथ और कई विभागों में होगा,परन्तु हम यहाँ पर अभी सिर्फ रेल विभाग की ही बात करते है।
      गाड़ी में लगी हुई भोजन यान में यदि खाने की थाली 300 हैं और एक का दाम 100 रुपय है और मेनेजर देखता है की थाली खरीदने वाले तो500 हैं तो वो फ़ोरन थाली का दाम 150 रूपए कर देगा और प्रभु जी उसको मना नहीं कर सकेंगे न ही उसे कालाबाजारी करने के जुर्म में गिरफ्तार करवा सकेंगे,क्योंकि वो वही कर रहा है जो प्रभु जी खुद कर रहे हैं ट्रेन में किराये को लेकर। और जब आप सर्ज प्राइसिंग का हवाला देकर कानूनन बच सकते हो तो वही कानून तो वो भी इस्तेमाल कर रहा है।
      यही सर्ज प्राइसिंग का हवाला देकर हर क्षेत्र के व्यवसायी काला बाजारी करेंगे और सरकार उनको रोक नहीं पायेगी क्योंकि जब सरकारी उपक्रम कोई नाजायज काम को ,कानून की नई परिभाषा गढ़ कर कानून के अंतर्गत ले आएगा तो उस कानून का उपयोग तो दूसरे भी करेंगे और इस प्रकार पूरे भारत वर्ष में कालाबाजारी एक भयंकर परन्तु कानूनी रूप लेकर तांडव करती नज़र आएगी और कोई भी फिर उसको रोक नहीं पायेगा।
      अन्त में हमें प्रभुजी से एक ही निवेदन करना है कि जो चिंगारी आप ने चीजों और वस्तुओं की कमी की आड़ लेकर "सर्ज प्राइसिंग"के रूप में लगाईं है यह चिंगारी एक दिन भारत के संसाधनों को कालाबाजारी की आग में ऐसे झोक देगी कि फिर आप क्या मोदीजी भी कुछ नहीं कर पायेंगे और पूरा भारत आप की लगाईं इस आग में झुलसता जायेगा। तब आप सिर्फ अफ़सोस ही कर पाएंगे।
       बाकी आपकी मर्जी आखिर आप अपने विभाग के सर्वेसर्वा हैं और लोग कहते भी हैं कि मोदी जी के काबिल मंत्रियों में आपकी गिनती होती है। धन्यवाद्।    KC Sir
    
    

Friday, 22 April 2016


                       आज  के  युवा  कब  करें  शादी  और  कब  बच्चे  हों

          आज के समय का बहुत ही महत्वपूर्ण परन्तु युवक युवतियों के द्वारा ध्यान न दिया जाने वाला विषय है "कब शादी करें एवं कब बच्चे हों"
          आज से तीस साल पहले जब हमारी शादी हुई थी तब लड़के लड़कियों की शादी की उम्र 22 से25 साल हुआ करती थी,और उससे 30-35साल पहले जब हमारे पिताजी की शादी हुई थी उस समय शादी की उम्र 18 से 21 साल हुआ करती थी।
          परन्तु अब जब हमारे बच्चों की शादी हुई तो शादी की उम्र बढ़ कर 26 से29 साल हो चुकी है।
          इन उदाहरणों को देखने से पता चलता है कि,2015-16 में जो शादी हुई और 1985-86 में जो शादी हुई ,दोनों शादी के समय लड़के लड़की की उम्र बढ़ कर 4-5 साल ज्यादा हो चुकी थी और जो शादी 1950-55 में हुई थी उस समय से शादी की उम्र 8से 10साल बढ़ कर 26 से29 वर्ष हो चुकी है।
          इन बातों से यह निष्कर्ष निकलता है कि,पिछली तीन पीढ़ियों में शादी की उम्र बढ़ कर 26 से29 वर्ष हो चुकी है जो अगली पीढ़ी तक बढ़ कर 30 से33 वर्ष अवस्य हो जाएगी। इसके पीछे कई कारण हैं,जिनके अन्दर हम इस लेख में नहीं जायेंगे,आगे फिर कभी इस विषय पर बात करेंगें। 

                    अब हम इस लेख के मूल प्रश्न पर आते हैं,कि कब शादी करें और कब बच्चे हो?

          इस प्रश्न के पहले भाग का उत्तर तो हमें मिल चुका है कि आज कल जो शादी हो रही है,मेरा मतलब 2015 से 2020 तक जो शादी होंगी उनके बच्चों की शादी के समय उम्र 30 से 33 साल होगी।

                अब प्रश्न ये है कि आजकल जो शादियाँ हो रही हैं उनको बच्चे कब पैदा करने चाहिए?

          आजकल के बच्चों की सोच है कि हम शादी के 4-5 साल बाद बच्चे की बात करेंगे,क्या यह सोच उचित है? क्या उन्होंने सोच समझ कर यह फैसला लिया है? क्या उन्होंने यह सोचा है की आज उनकी उम्र क्या है? क्या उन्होंने यह सोचा है कि जब 5 साल बाद उनके बच्चे होंगे तो उसके 30-35 साल बाद जब उनको जिन्दगी में व्यवस्थित करना होगा और उनकी शादी करनी होगी तो,आज के इन नए शादीशुदा बच्चों की उम्र क्या हो चुकी होगी? क्या यह आज के बच्चे कल के बच्चों के अभिभावक कार्यरत भी होंगे? क्या वो इस स्थिति में भी होंगें कि वो अपनी उस ज़रूरी जिम्मेदारी का दायित्व भी निभा पाएंगे? अगर वो सेवानिवृत हो चुके होंगे तो क्या उनके पास पर्याप्त धन होगा जो वो अपने बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकेंगें? और क्या उसके लिए उनके पास उम्र बची होगी? क्या उनका शरीर उनका साथ देने की स्थिति में होगा ? क्योंकि उस समय उनकी उम्र 63 से 67 साल हो चुकी होगी। क्या उम्र के उस पड़ाव पर वो बच्चों के बच्चो के प्रति अपना कोई कर्त्तव्य निभा पाएंगे? और क्या उस उम्र में वो अपने हमराही के प्रति अपनी जिम्मेदारी और अपने बुढ़ापे का ख्याल रख पाएंगे?

                                 क्या 65 से 70 साल की उम्र बच्चो की शादी करने की होती है? 


        निश्चित नहीं,तो क्या हमें अपने बच्चों को यह नहीं समझाना चाहिए कि,यदि उनकी उम्र 27 से30 साल हो चुकी है तो उन्हें फ़ौरन बच्चों के बारे में सोचना शुरू कर देना चाहिए जिससे अपने सेवानिवृत होने से पहले वो अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर काबिल बना कर उनकी शादी कराकर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर सकें।जो कि आज 30 की उम्र में बच्चा होने पर अभिभावक की 63 से 65 साल की उम्र पर उसकी शादी सम्भव हो पायेगी।
        हालाकिं हमें उम्मीद कम ही है कि आजकल की पढ़ी लिखी पौध जो अपनी सोच के आगे बुजुर्गों के अनुभव और विचारों को नगण्य मानती है, इस लेख में लिखे एवं बताये हुए विचारों को मन लगाकर पढेगी और मंथन करेगी तथा इसकी बातों की गहराई में जाकर विचार करेगी,परन्तु अगर ऐसा करेगी तो उसे अवस्य लाभ होगा और वो इसपर अमल करके अपने आने वाले कल और आने वाले भविष्य के बच्चों के कल को सुन्दर और सुरक्षित बना  सकेगी। मेरी शुभकामनाये हमेशा बच्चों के साथ हैं। सब बच्चों एवं बड़ों के विचार आमंत्रित हैं, खुलकर टिप्पड़ी करें। धन्यवाद्।                                                             KC Sir