मोदी जी के प्रिय प्रभू ने काला - बाजारी को पहनाया कानूनी चोला।
जी हाँ,सुनने में कुछ अटपटा ज़रूर लग रहा है पर है सोलह-आने सच। प्रभुजी ने ऐसा कानून बना दिया है कि काला- बाजारी भी करो और वो भी कानूनन, यानि कानून आप का कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा।आप सोच रहे होंगे क्या बहकी बहकी बातें कर रहे हैं।
अरे साब हम बिलकुल सही कह रहे हैं। अब बस आपको अपनी कालाबाजारी को एक नया नाम(सर्ज प्राइसिंग) देना पड़ेगा,और बस आप धड़ल्ले से कालाबाजारी कीजिये किसी की हिम्मत नहीं होगी जो रोक सके,आखिर मोदी जी के प्रिय प्रभू जी ने इस सिद्धांत को कानूनी जामा जो पहना दिया है।
प्रभुजी कहते हैं कि यदि आपके पास कोई वस्तु 100 है और वो आप 1000रूपए प्रति वस्तु बेचना तय करते है,लेकिन आपको लगता है कि खरीदने वाले तो100 से बहुत ज्यादा हैं तो आप उस वस्तु को (उभरती दर)के अंतर्गत 1000 रूपए से ज्यादा,1500 रूपए में भी कानूनन बेच सकते है,और 1500 रूपए लेना अपराध नहीं होगा,जो पहले अपराध (कालाबाजारी)माना जाता था।
पहले हज़ारों लोग वस्तुओं की कालाबाजारी करने के जुर्म में जेलों की हवा खा चुके है। परन्तु अब इस नये कानून के अंतर्गत आकर कालाबाजारी भी सफ़ेद चकाचक ईमानदार व्यवसाय में परवर्तित हो जायेगी।
जब सरकारी उपक्रम प्रभु जी की रेल में इस पुराने जमाने में कालाबाजारी कही जाने वाली धारणा को नया नाम देकर उसका शुद्धिकरण कर दिया गया है तो फिर किसकी मज़ाल है जो इस कालाबाजारी को काला बाजारी कहने की हिम्मत करेगा,यह तो( सर्ज प्राइसिंग) है,और इस नए नामकरण की आड़ में भारतीय गरीब जनता को लूटने के नये रास्ते खोज लिए हैं इस केंद्र सरकार ने।
शायद आप में से बहुत सारे लोगों को यह पता भी नहीं होगा कि इस नए क़ानून की आड़ लेकर भारत सरकार की भारतीय रेल के करता धरता श्रीमान प्रभुजी ने भारत में चलने वाली 146 रेलगाड़ियों का किराया 50% तक बढाने का इंतजाम कर लिया है और वो पिछले हफ्ते से लागू भी हो गया है।
यह बढ़ा हुआ किराया गरीब जनता से ही वसूला जायेगा, क्योंकि अमीर लोगों की श्रेणी ,यानि की ए सी 1st जैसी श्रेणी में जिसमे अमीर लोग चलते हैं ये कालाबाजारी नहीं की जाएगी। देखिये प्रभुजी कितना ख्याल रखते हैं अमीर लोगों का कि उनपर ज्यादा बोझ न बढे।
सरकारी रेल का भी कितना ध्यान दिया है प्रभुजी ने कि एक ही झटके में 50% तक किराया बढ़ा दिया और आगे अन्य गाड़ियों में भी ऐसा ही करेंगे यह भी बता दिया है।
अब आप सोचिये कहाँ लालूजी जो बेचारे यह सोच - सोच कर ही खुश थे कि उन्होंने रेलमंत्री रहते हुए किराया नहीं बढाया ,और कहाँ हमारे प्रभुजी जो साल में कई कई बार अलग अलग तरीकों का इस्तेमाल करके किराया बढ़ाते रहते है,यकीन न हो तो हम याद दिलायें कि पिछले डेढ़ साल में कितनी बार कितनी तरह से किराया बढाया है।
अब इस कानून का फायदा रेल विभाग के साथ साथ और कई विभागों में होगा,परन्तु हम यहाँ पर अभी सिर्फ रेल विभाग की ही बात करते है।
गाड़ी में लगी हुई भोजन यान में यदि खाने की थाली 300 हैं और एक का दाम 100 रुपय है और मेनेजर देखता है की थाली खरीदने वाले तो500 हैं तो वो फ़ोरन थाली का दाम 150 रूपए कर देगा और प्रभु जी उसको मना नहीं कर सकेंगे न ही उसे कालाबाजारी करने के जुर्म में गिरफ्तार करवा सकेंगे,क्योंकि वो वही कर रहा है जो प्रभु जी खुद कर रहे हैं ट्रेन में किराये को लेकर। और जब आप सर्ज प्राइसिंग का हवाला देकर कानूनन बच सकते हो तो वही कानून तो वो भी इस्तेमाल कर रहा है।
यही सर्ज प्राइसिंग का हवाला देकर हर क्षेत्र के व्यवसायी काला बाजारी करेंगे और सरकार उनको रोक नहीं पायेगी क्योंकि जब सरकारी उपक्रम कोई नाजायज काम को ,कानून की नई परिभाषा गढ़ कर कानून के अंतर्गत ले आएगा तो उस कानून का उपयोग तो दूसरे भी करेंगे और इस प्रकार पूरे भारत वर्ष में कालाबाजारी एक भयंकर परन्तु कानूनी रूप लेकर तांडव करती नज़र आएगी और कोई भी फिर उसको रोक नहीं पायेगा।
अन्त में हमें प्रभुजी से एक ही निवेदन करना है कि जो चिंगारी आप ने चीजों और वस्तुओं की कमी की आड़ लेकर "सर्ज प्राइसिंग"के रूप में लगाईं है यह चिंगारी एक दिन भारत के संसाधनों को कालाबाजारी की आग में ऐसे झोक देगी कि फिर आप क्या मोदीजी भी कुछ नहीं कर पायेंगे और पूरा भारत आप की लगाईं इस आग में झुलसता जायेगा। तब आप सिर्फ अफ़सोस ही कर पाएंगे।
बाकी आपकी मर्जी आखिर आप अपने विभाग के सर्वेसर्वा हैं और लोग कहते भी हैं कि मोदी जी के काबिल मंत्रियों में आपकी गिनती होती है। धन्यवाद्। KC Sir
जी हाँ,सुनने में कुछ अटपटा ज़रूर लग रहा है पर है सोलह-आने सच। प्रभुजी ने ऐसा कानून बना दिया है कि काला- बाजारी भी करो और वो भी कानूनन, यानि कानून आप का कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा।आप सोच रहे होंगे क्या बहकी बहकी बातें कर रहे हैं।
अरे साब हम बिलकुल सही कह रहे हैं। अब बस आपको अपनी कालाबाजारी को एक नया नाम(सर्ज प्राइसिंग) देना पड़ेगा,और बस आप धड़ल्ले से कालाबाजारी कीजिये किसी की हिम्मत नहीं होगी जो रोक सके,आखिर मोदी जी के प्रिय प्रभू जी ने इस सिद्धांत को कानूनी जामा जो पहना दिया है।
प्रभुजी कहते हैं कि यदि आपके पास कोई वस्तु 100 है और वो आप 1000रूपए प्रति वस्तु बेचना तय करते है,लेकिन आपको लगता है कि खरीदने वाले तो100 से बहुत ज्यादा हैं तो आप उस वस्तु को (उभरती दर)के अंतर्गत 1000 रूपए से ज्यादा,1500 रूपए में भी कानूनन बेच सकते है,और 1500 रूपए लेना अपराध नहीं होगा,जो पहले अपराध (कालाबाजारी)माना जाता था।
पहले हज़ारों लोग वस्तुओं की कालाबाजारी करने के जुर्म में जेलों की हवा खा चुके है। परन्तु अब इस नये कानून के अंतर्गत आकर कालाबाजारी भी सफ़ेद चकाचक ईमानदार व्यवसाय में परवर्तित हो जायेगी।
जब सरकारी उपक्रम प्रभु जी की रेल में इस पुराने जमाने में कालाबाजारी कही जाने वाली धारणा को नया नाम देकर उसका शुद्धिकरण कर दिया गया है तो फिर किसकी मज़ाल है जो इस कालाबाजारी को काला बाजारी कहने की हिम्मत करेगा,यह तो( सर्ज प्राइसिंग) है,और इस नए नामकरण की आड़ में भारतीय गरीब जनता को लूटने के नये रास्ते खोज लिए हैं इस केंद्र सरकार ने।
शायद आप में से बहुत सारे लोगों को यह पता भी नहीं होगा कि इस नए क़ानून की आड़ लेकर भारत सरकार की भारतीय रेल के करता धरता श्रीमान प्रभुजी ने भारत में चलने वाली 146 रेलगाड़ियों का किराया 50% तक बढाने का इंतजाम कर लिया है और वो पिछले हफ्ते से लागू भी हो गया है।
यह बढ़ा हुआ किराया गरीब जनता से ही वसूला जायेगा, क्योंकि अमीर लोगों की श्रेणी ,यानि की ए सी 1st जैसी श्रेणी में जिसमे अमीर लोग चलते हैं ये कालाबाजारी नहीं की जाएगी। देखिये प्रभुजी कितना ख्याल रखते हैं अमीर लोगों का कि उनपर ज्यादा बोझ न बढे।
सरकारी रेल का भी कितना ध्यान दिया है प्रभुजी ने कि एक ही झटके में 50% तक किराया बढ़ा दिया और आगे अन्य गाड़ियों में भी ऐसा ही करेंगे यह भी बता दिया है।
अब आप सोचिये कहाँ लालूजी जो बेचारे यह सोच - सोच कर ही खुश थे कि उन्होंने रेलमंत्री रहते हुए किराया नहीं बढाया ,और कहाँ हमारे प्रभुजी जो साल में कई कई बार अलग अलग तरीकों का इस्तेमाल करके किराया बढ़ाते रहते है,यकीन न हो तो हम याद दिलायें कि पिछले डेढ़ साल में कितनी बार कितनी तरह से किराया बढाया है।
अब इस कानून का फायदा रेल विभाग के साथ साथ और कई विभागों में होगा,परन्तु हम यहाँ पर अभी सिर्फ रेल विभाग की ही बात करते है।
गाड़ी में लगी हुई भोजन यान में यदि खाने की थाली 300 हैं और एक का दाम 100 रुपय है और मेनेजर देखता है की थाली खरीदने वाले तो500 हैं तो वो फ़ोरन थाली का दाम 150 रूपए कर देगा और प्रभु जी उसको मना नहीं कर सकेंगे न ही उसे कालाबाजारी करने के जुर्म में गिरफ्तार करवा सकेंगे,क्योंकि वो वही कर रहा है जो प्रभु जी खुद कर रहे हैं ट्रेन में किराये को लेकर। और जब आप सर्ज प्राइसिंग का हवाला देकर कानूनन बच सकते हो तो वही कानून तो वो भी इस्तेमाल कर रहा है।
यही सर्ज प्राइसिंग का हवाला देकर हर क्षेत्र के व्यवसायी काला बाजारी करेंगे और सरकार उनको रोक नहीं पायेगी क्योंकि जब सरकारी उपक्रम कोई नाजायज काम को ,कानून की नई परिभाषा गढ़ कर कानून के अंतर्गत ले आएगा तो उस कानून का उपयोग तो दूसरे भी करेंगे और इस प्रकार पूरे भारत वर्ष में कालाबाजारी एक भयंकर परन्तु कानूनी रूप लेकर तांडव करती नज़र आएगी और कोई भी फिर उसको रोक नहीं पायेगा।
अन्त में हमें प्रभुजी से एक ही निवेदन करना है कि जो चिंगारी आप ने चीजों और वस्तुओं की कमी की आड़ लेकर "सर्ज प्राइसिंग"के रूप में लगाईं है यह चिंगारी एक दिन भारत के संसाधनों को कालाबाजारी की आग में ऐसे झोक देगी कि फिर आप क्या मोदीजी भी कुछ नहीं कर पायेंगे और पूरा भारत आप की लगाईं इस आग में झुलसता जायेगा। तब आप सिर्फ अफ़सोस ही कर पाएंगे।
बाकी आपकी मर्जी आखिर आप अपने विभाग के सर्वेसर्वा हैं और लोग कहते भी हैं कि मोदी जी के काबिल मंत्रियों में आपकी गिनती होती है। धन्यवाद्। KC Sir