Tuesday, 1 August 2017

 GST में सर्विसेस टैक्स करेगा कमाल,भरेगा ख़ज़ाना,देश होगा मालामाल
    भारत सरकार को मनमोहन सिंह जी ने एक अलादीन का जादुई चिराग,सर्विस टैक्स के रूप में दिया था,जो धीरे धीरे अब अपना जलवा दिखाने लगा था,और अब एकदम से GST के अंतर्गत आने के बाद तो यह भारत सरकार का एक सपूत सिद्ध होगा,जो देश के सरकारी खजाने को अपने दम पर भरने का काम करेगा।
     2014 में जब मनमोहन सिंह जी की सरकार गयी,और मोदी जी आये,तो सर्विस  टैक्स 12 प्रतिशत था और उस टैक्स पर 2 प्रतिशत और 1प्रतिशत शिक्षा अधिभार औऱ उच्च शिक्षा अधिभार लगता था।मतलब 12.36 प्रतिशत सर्विस टैक्स की दर से टैक्स पड़ता था।
    वर्ष 2013-2014 में सर्विस टैक्स के रूप में 154778 रुपये सरकारी खजाने में आये थे।
    मोदी जी ने मई 2014 को प्रधानमंत्री का पद सम्भाला और अगले साल1 जून 2015 से सर्विस टैक्स को 15 प्रतिशत कर दिया गया,सारे अधिभारों सहित।इसका फायदा सरकार को मिला और जो सर्विस टैक्स 2014-2015 में 168132करोड़ था वो 2015-2016 में बढ़कर 209774 करोड़ हो गया,(करीब 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ।)
      यही सर्विस टैक्स 2016-2017 में बढ़कर 247500 करोड़ हो गया था।(करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी )
      अब जब सर्विसेज टैक्स 15 की बजाए 18 प्रतिशत हो जाएगा GST के रूप में तो 2017-2018 में टैक्स करीब करीब 40-45 प्रतिशत बढ़ेगा,पिछले साल के मुकाबले में, यानी,करीब 1लाख करोड़ रुपये बढ़कर 350000 करोड़ रुपये सिर्फ़ सर्विसेस टैक्स से आएगा।
       इससे आप लोग अंदाजा लगा सकते हो कि सर्विसेज पर टैक्स लगाकर मनमोहन सिंह जी ने कितना बड़ा काम सरकारी ख़ज़ानों को भरने के लिए कर दिया था।यह अप्रत्यक्ष कर धीरे धीरे प्रत्यक्ष कर से बड़ा रूप धारण करता जाएगा और एक दिन प्रत्यक्ष कर को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।     KC Sir
      
               सी ऐ जी ने मोदी जी के कमाऊ और प्रिय रेल मंत्री प्रभु जी की खोली पोल l
   146 गाड़ियों  के टिकट्स का दाम औसतन 33 प्रतिशत बढाने के बावजूद,एवं अन्य कई सेवाओं में बेतहासा दाम बढ़ाने के बावजूद,मोदी जी के प्रिय प्रभु ने भारतीय रेल में मिलने वाले खाने की गुड़वत्ता एवं मात्रा में की भारी गिरावट  खाना मनुष्यों के खाने लायक नहीं,lऐसा कहना है CAG का जो भारत सरकार का ही एक विभाग है l CAG ने रेल मंत्री के विभाग और कार्यों की समीक्षा में पाया बहुत बड़ा घपला l
     2014-2015 में जो 8000 शिकायतें खराब खाने को लेकर आयीं थीं,वो 2015-2016 में बढ़कर 11974,यानि करीब 16 शिकायतें रोजाना हो गयीं,वो भी तब जब,80 प्रतिशत लोग शिकायत कर नहीं पाते,या उनको पता नही होता है की शिकायत कहाँ और किससे करें l
     CAG ने 80 रेलगाड़ियों के 1975 यात्रियों से बातें की और 74 स्टेशनों पर 1800 यात्रियों से भी बातें करके यह सारे निष्कर्ष निकाले हैं l
  1.   सिर्फ 16 बेस किचन रेलवे परिसर में हैं,बाकी 115 बेस किचन स्टेशनों से बहुत दूरी पर हैं l
  2.   ट्रेन में पैनट्री कार में खाने को ढक कर नहीं रक्खा जाता है l
  3.   खाना बनाने में साफ पानी का प्रयोग नहीं होता है l
  4.   ट्रेन की रसोईघर में सफाई नहीं रहती है,वहाँ चूहे ,कीड़े मकोड़े और तिलचट्टे आदि घूमत रहते हैं l
  5.   यात्रियों को खाने की कीमत के बारे में ठीक से नही बताया जाता,भ्रमित किया जाता है l
  6.   खाने की मात्रा भी दर्शाई (बताई ) गयी मात्रा से कम होती है l
  7.   खाने का बिल देने का भी कोई प्रावधान नहीं है l
  8.   बाज़ार भाव से ज्यादा दाम वसूले जाते हैं l
  9.   प्रिन्ट दाम से ज्यादा दाम पैकेट बंद उत्पादों पर लिये जाते हैं l
 10.  डिब्बाबन्द और बोतलबन्द उत्पादों को एक्सपायरी डेट के बाद भी बेचा जाता है l
      CAG ने तो यहाँ तक कह दिया है कि"ट्रेनों एवं स्टेशनों पर मिलने वाला खाना,मनुष्यों के खाने के उपयुक्त नहीं है"l
      CAG की इस रिपोर्ट के आने के बाद भारत की जनता को यह पूछने का अधिकार तो मिल ही जाता है कि क्या प्रभु जी को सिर्फ रेलवे की आमदनी बढ़ाने के लिए रक्खा गया है,क्या हर चीज में हर काम में दाम बढ़ना ही उनका ध्येय है?
       क्या IRCTC के द्वारा किये जा रहे ग़लत कार्य-कलापों के ऊपर निगाह रखना प्रभु जी के कार्यों में नहीं शामिल है?
       क्या भारत की निरीह जनता को प्रभु जी ने सिर्फ और सिर्फ एक दुधारू गाय के रूप में ही जाना है और उन्हें एक जानवर से भी बद्तर समझा है ,जो इस तरह का व्यहार वो भारतीय रेलवे के द्वारा करवा रहें है?क्या जवाब मिलेगा प्रभू?  KC Sir