डिस्पोसब्ल गुड्स के इस्तेमाल से बनते कूड़े का नॉन-डिस्पोसब्ल अम्बार दुबारा इस्तेमाल में न लाने वाले सामान के लिए डिस्पोसब्ल शब्द का इस्तेमाल करके क्या नाम रखने वाले ने गलती करी? आप विचार करें सोचें, समझें, ध्यान लगाएं और फिर अपने विचारों से हमें अवगत करायें.
स्वच्छ भारत के मोदी जी के आवाहन के मद्दे नज़र,अगर हम विचार करें तो हम पायेंगे कि कूड़ा इस अभियान का असली हीरो है,कुछ लोगों की नज़र में यह विलेन यानि खलनायक भी हो सकता है,क्योंकि इस कूड़े को ही हटा कर भारत को स्वच्छ बनाया जा सकता है जो की मोदी जी चाहते हैं.
स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत करते समय शायद मोदीजी ने यह इतने आगे तक नहीं सोचा होगा की आज भारत में कूड़ा कैसा होता है,या कितने प्रकार का होता है.
क्या आज के भारत का कूड़ा सफेदपोश नेता, अधिकारी,बड़े-बड़े कारोबारी,खिलाड़ी इत्यादि के सिर्फ झाड़ू लगा देने भर से साफ़ हो जायेगा?
आज के भारत का कूड़ा आज से तीस साल पहले के भारत के कूड़े से बहुत अलग किस्म का हो गया है.तीस-चालीस साल पहले के भारत के कूड़े को एक गड्डे में गाड़ कर मट्टी से बंद कर छोड़ देने पर कम्पोस्ट खाद बन जाती थी जो खेतों में काम आती थी ,ऐसा हमने पढ़ा था.अगर उस तरह का कूड़ा आज भी होता तो इस सफाई अभियान से बहुत फायेदा होने वाला था.
मगर साहेब आज के भारत का कूड़ा बड़ा जड़ीला हो गया है,शायद आज के भारतके............जैसा. आप समझदार है खुद समझ लें.
अगर हमें कूड़ा साफ़ करना है और एक स्वच्छ भारत की तस्वीर दुनिया को दिखानी है, (जो कि हमें अवस्य करना है.) तो हमें पहले समझना होगा की भारत में कहाँ,किस जगह,किस तरह का कूड़ा पाया जाता है,और उसे साफ़ करने के लिए कौन सा तरीका या विधि अपनानी पड़ेगी.
आज के कूड़े में दो तरह के पदार्थ पाए जातें हैं,
1. वो जो नष्ट हो जाते हैं.
2. वो जो नष्ट नहीं होते हैं.
वो कूड़ा जो नष्ट हो जाता है हमारे आपके लिए चिंता का विषय भी नहीं है,क्योंकि यह कूड़ा सदियों से है और आसानी से इसे साफ़ किया जा सकता है,या इससे खाद बनाई जा सकती है.परन्तु वो दूसरे प्रकार का कूड़ा जो नष्ट नहीं होता,आज पुरे संसार के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है.
अब हम अपने असली मुद्दे,यानि डिस्पोसब्ल गुड्स के इस्तेमाल से होने वाले नॉन डिस्पोसब्ल कूड़े के बढ़ते अम्बार से कैसे बचा जा सकता है पर आते हैं.
तरह -तरह के डिस्पोसब्ल गुड्स आज भारत में इस्तेमाल होने लगे हैं,जो कुछ इस प्रकार हैं;
1.चाय पीने के लिए कप,जो की पी.पी.प्लास्टिक या प्लास्टिक कोटेड पेपर से बने होते हैं और आजकल सारे हिन्दोस्तान में करोड़ों की तादाद में रोजाना इस्तेमाल हो रहे हैं,यह कप सहरों की नालियों में आपको हजारों की तादाद में पड़ें मिलेंगे जो की नालियों को चोक करने का काम बखूबी करते हैं.
2.खाना खाने वाली प्लास्टिक की या थर्मोकोल की थालियाँ,प्लेट,चम्मच कटोरी इत्यादि जिनका चलन दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है,कूड़ा बनाने में बहुत मददगार साबित हो रही हैं.
3.पी .वी.सि.कोटेड पाउच,जो की पान मसाले,तम्बाकू, बच्चों की टॉफी,दूध,रसोई के मसाले,चोकलेट,आलू चिप्प्स इत्यादि न जाने किस-किस चीजों को पैक करने के काम आ रहे हैं,पुरे देश भर में सड़कों पर,नालियों में,रेलवे लाइन के किनारे बिखरे नज़र आयेंगे जो कि आने वाले समय में बहुत विकराल रूप लेने वाले हैं.
4.पी.वी.सि.या पी.पी. प्लास्टिक से बने लिफाफे, थैलियाँ और झोले भी आज नॉन डिस्पोसब्ल कूड़े को बढाने में बहुत सहायक हो रहे हैं.
5.मेडिकल लाइन में इस्तेमाल होने वाली सिरिंज और प्लास्टिक की टेस्ट टयुब,स्टूल और यूरिन टेस्ट में इस्तेमाल होने वाली डिब्बियां भी इस कूड़े को बढाने का काम कर रहे हैं.
6.आजकल एक और चीज है जो गन्दगी को बढ़ा रही है वो है बच्चों और बड़ों के द्वारा इस्तेमाल होने वाले डैपेर(diper).
विकसित देशों ने डिस्पोसब्ल गुड्स के इस्तेमाल के बाद बनते कूड़े को रीसायकल करने का प्रबंध करके इस कूड़े से फिर से सामान बनाने का इंतजाम कर लिया है,जिससे उन देशों में डिस्पोसब्ल गुड्स का कूड़ा उतनी भयंकर इस्थिति में नहीं पहुँच पा रहा है जितना कि भारत में
भारत में डिस्पोसब्ल गुड्स से उत्पन्न हुए कूड़े का प्रबंधन करना,यानि उसे अलग अलग श्रेडियों में छाटना,बीनना,बाटना और फिर उसे रीसायकल करना अभी न के बराबर हो पा रहा है.
जबतक हम भारत में डिस्पोसब्ल गुड्स के कूड़े को सड़कों ,नालियों और कूड़ाघर में जाने के बजाये वापस कारखानों में रीसायकल होने के लिए भेजने का इंतजाम करने में सक्षम नहीं हो जाते तब तक शायद हम स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने में विफल रहेंगें.
क्योंकि डिस्पोसब्ल शब्द का इस्तेमाल इसलिये किया गया था की आप स्तेमाल करें डिस्पोस करें और उसे फिर से बना कर फिर इस्तेमाल करे, और यह चेन बनी रहे,न कि एक बार इस्तेमाल करके उसे कूड़े में दाल दो.
आप सब से हमारी यही प्रर्थना है की आप कम से कम डिस्पोसब्ल गुड्स का इस्तेमाल करें,जितना हो सके ना करें,जितना करें,उसको सही तरीके से सही जगह पर डिस्पोस करने का कष्ट करें और मोदी जी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने में अपनी भागेदारी निभाएं. धन्यवाद.
Nice
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