लंगड़ी चींटी जैसी चाल का मारा,भारतीय इन्टरनेट उपभोक्ता बेचारा
ऐसा बताया जाता है की भारत में ऐसे बेचारे,एक दो या दस बीस हज़ार या सौ दो सौ लाख नहीं,बल्कि करीब पचीस करोड़ हो गए हैं.सुनने में कुछ अजीब सा लगता है फिर हँसी भी आती है,क्योंकि यह सारे बेचारे,अपने को बेचारा कहे जाने पर नाराज भी हो सकते हैं,क्योंकि इनमे से ज्यादा तर पढ़े-लिखे,अच्छी हैसीयत वाले,सम्भ्रान्त नागरिक हैं.
अब आप जानना चाहेंगे कि यह सब बेचारे कैसे बन गए?
मेरी नज़र में जो मनुष्य अपनी गलती न होने के बावजूद,दूसरों की गलतियों की सजा भुगतने पर मजबूर हो,बार-बार लगातार,तथा उनकी सुनने-वाला कोई न हो,तो वे व्यक्ति बेचारे कहलाने योग्य हो जाते है.
यह भारतीय इन्टरनेट उपभोक्ता अपने-आप में तो बेचारे हैं,परन्तु पूरी दुनिया की आबादी के हिसाब से देखा जाये तो भारत इन्टरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या के हिसाब से दुनिया में दूसरे नम्बर पर आता है,परन्तु यह भी सत्य है की यदि आबादी के प्रतिशत के हिसाब से भारत में इन्टरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या देखी जाये तो यह दुनिया के देशों में नवें स्थान पर है.
अब बात यह आती है की,जब दुनिया में इन्टरनेट इस्तेमाल करने वालों में भारतीय उपभोक्ता नम्बर दो पर है तो फिर वोह बेचारा कैसे हो गया?
भारतीय इन्टरनेट उपभोक्ता को बेचारा बनाने वाले निम्न कारण हैं:
1. अमेरिका के इन्टरनेट उपभोक्ता जिस एक mb data के लिए ३००/०० भारतीय रूपए खर्च करते हैं,भारतीय उपभोक्ता उसी एक mb data के लिए ३३००/०० भारतीय रूपए(मतलब ग्यारह गुना ज्यादा )खर्च करते हैं.और इसके बावजूद दाम अभी भी दिन दुने रात चौगुने वाली कहावत के अनुरूप बढ़ रहे हैं.
2. अमेरिका या अन्य देशों में जो स्पीड इन्टरनेट की मिलती है हमारे भारत में उससे दस गुना कम स्पीड मिलती है.
3. भारत में जो स्पीड आपके प्लान में आपको बताई जाएगी उसकी आधी या चौथाई स्पीड भी अगर आपको प्राप्त हो जाये तो आप अपने आपको बहुत भाग्यशाली समझियेगा ,हालांकि ऐसा होना,निकट भविष्य में तो संभव दिखता नहीं है.
4. अगर आपको बताया गया की आपके प्लान की स्पीड 3.1mbps है तो समझ लीजिये की आपको जो स्पीड आएगी वोह,ज्यादा से ज्यादा 300kbps होगी,वोह भी कभी कभी,झलक दिखलाएगी.लंगड़ी चींटी की चाल जैसी दो सेकंड के लिए 50kbps,फिर चार सेकंड के लिए 15kbps,फिर तीन सेकंड के लिए 80kbps,फिर पांच मिनट के लिए 0kbps,फिर तीस सेकंड के लिए 300kbps.यह आँख-मिचौली हमारे उपभोक्ता को खेलनी पड़ती है,या यों कहिये कि झेलनी पड़ती है.
उपरोक्त कारणों की वजह से भारतीय इन्टरनेट उपभोक्ता बेचारा बन कर रह गया है आज अपने प्रधानमंत्री मोदी जी, जो कि हर तरह से, हर काम में आगे से आगे इन्टरनेट के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात करते हैं,क्या भारतीय इन्टरनेट उपभोक्ता की इस बेचारगी से अनभिज्ञ हैं? यदि ऐसा है तो और भी दुखद बात है और यदि ऐसा नहीं है तो उन्हें भारतीय इन्टरनेट की इस दुर्दशा की तरफ फ़ौरन ध्यान देकर इसको स्वस्थ, बलवान एवं स्फूर्तिवान बनाने की तरफ पूरा ध्यान देना चाहिए, क्योंकि वे जिस ओर भारत को ले जाना चाहते हैं,उस गंतव्य की पहली,दूसरी और तीसरी सीढ़ी है: 1. इन्टरनेट की सहज उपलब्धता
2. इन्टरनेट की असीमित गति एवं
3. इन्टरनेट की सस्ती दरें
जिस दिन भारत इन्टरनेट की दुनिया में विकसित देशों के समकक्ष खड़ा हो पायेगा ,उसदिन से ही हम मोदी के सपनो का भारत देख पाएंगे अन्यथा नहीं,इस बात को हमारे प्रधानमंत्री एवं उनके दूरसंचारमंत्री जितनी जल्दी समझेंगे उतना अच्छा होगा.
इसलिये कृपया इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर कम्पनियों की मनमानी रोकिये रोज दाम बढ़ानेवाली प्रतिस्पर्धा बंद कीजिये तथा दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई)को उनके कार्य छेत्र की जानकारी कराइए, की यह प्राधिकरण उपभोक्ता की भलाई के लिए बनाया गया था, न कि सर्विस प्रोवाइडर कम्पनियों की जेबें भरने में मदद करने के लिए,क्योंकि पिछले छ-आठ महीने में इन्टरनेट सेवाओं के दाम जिस मनमाने तरीके से बढ़ें हैं और आज भी बढ़ रहे है ऐसा लगता नहीं है की कोई नियामक प्राधिकरण कार्य भी कर रहा है.
२०१२ में जब ख़बर आयी थी की अनिल अम्बानी के भाई दूरसंचार के छेत्र में आ रहे है तभी उनकी तरफ से अखबारों में छपा था की उनकी कम्पनी इन्टरनेट की उस समय चल रही दरों को दस गुना कम कर देंगी.परन्तु ,उस समय की दरों से दो से तीन गुना दाम बढ़ चुके हैं(यानि की अगर उस समय कोई दर १०० रूपए प्रति माह थी,जो मुकेश अम्बानी की कम्पनी १० रूपए प्रति माह करने की बात कर रही थी,वो दर आज १० रूपए की बजाय २०० रूपए या उससे भी अधिक है.) और कोई सुध लेने वाला नहीं है.
अगर आपको लगे की दूरसंचार के छेत्र में लूट मची हुई है तो कृपया इस लेख के बारे में अपनी राय से हमें अवस्य अवगत कराएँ.
धन्यवाद KC Sir [K.C.MEHROTRA]
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