आज कल का ज्वलंत विषय,बच्चो के हाथ में मोबाइल,कितना सही कितना गलत?
यह आजकल का ही नहीं हर साल छह महीने मे यह विषय ज्वलंत हो जाता है,क्योंकि कोई न कोई M.P.या M.L.A. इस बारे में कोई बयान जारी कर देता है,फिर क्या टीवी चैनल्स पर लम्बी लम्बी बहस चालू हो जाती हैं.समाज के गणमान्य व्यक्तियों को टीवी पर अपने विचार रखने का मौका मिलता है कोई कहता है,बच्चो के हाथ में मोबाइल नहीं देना चाहिए,जैसा की पिछले दिनों किसी M.L.A. साहेब ने कहा.टीवी के एंकर एवं उनके सहयोगियों को अपने अच्छे बुरे विचार रखने का मौका मिलता है.
टीवी पर बहस में बच्चो और उनके माता-पिता को आमंत्रित किया जाता है.चैनेल के कुछ समझदार व्यक्ति बैठते हैं और बहस शुरू हो जाती है.एक घंटे का प्रोग्राम होता है,साठ मिनट में से चालीस मिनट व्यावसायिक विज्ञापन देखने दिखाने में बीत जाता है,बाकी बचे बीस मिनट में जो बहस होती है,उसमें से बहुत सा समय बहस करने वालो के बीच में आपसी बहस आदि में निकल जाता हैं.
टीवी चैनल्स को हफ्ते भर का मसाला मिल जाता है,विज्ञापन खपाने का,गणमान्य लोगों को मौका मिल जाता है टीवी पर अपनी शक्ल दिखाने का,और ऐसे व्यकतव्य देने का जिसका कोई अर्थ या मतलब नहीं निकलता.
इस विषय से जिन लोगों पर असर पड़ना है,यानी माता-पिता एवं बच्चे,अपनी बात तो रखना चाहते हैं और रखते भी हैं जितना भी समय उन्हे मिलता है,परन्तु वो बातें गौड़ हो जाती हैं,उन बातो को वोह अहमियत नहीं दी जाती,जिससे इस समस्या का कोई हल निकले.
M.L.A.साहेब का कहना है की पढने वाले बच्चे स्कूल में मोबाइल ले जाते हैं जिसका गलत उपयोग हो रहा है,बच्चे बिगड़ रहे हैं इसलिये स्कूल में मोबाइल ले जाना बंद होना चाहिए.उनके हिसाब से सरकार को को इस बाबत नियम बनाना चाहिए जिसका सख्ती से पालन होना चाहिए.
बच्चों के माँ-बाप का कहना है,बच्चे दूर-दूर तक पढने, स्कूल एवं टयुसन लेने जाते हैं,घंटों घर से बाहर रहते हैं,उनके पास मोबाइल नहीं होगा तो उनको बच्चों की सलामती के बारे में कैसे पता चलेगा.माँ-बाप की बात में भी दम नजर आता है.
अब बच्चों की बात आती है,उनका कहना है की मोबाइल तो हमारी जरूरत और अधिकार है.कोई ऐसे कैसे कानून बना देगा,कल को हमारे ऊपर कोई मुसीबत आती है और हमारे पास मोबाइल नहीं है,हम माता-पिता को खबर नहीं कर पाते हैं और घटना घट जाती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
सालों हो गए हैं इस तरह की बहस होते हुए,आज-तक किसी ने कोई भी अंजाम निकाल कर नहीं दिया.हम आप से पूछते हैं क्या आपको इस समस्या का कोई हल दिखाई पड़ रहा है?यदि हाँ तो आप हमसे बताएं,यदि नहीं तो हम आपको इस समस्या का जो हल बताने जा रहे हैं,उस पर अपनी राय दे ,हमें बताये की हमारा हल कितना-सही या कितना गलत है. हमें आपकी राय जानने का इन्तजार रहेगा.
किसी भी समस्या का हल ढूंढने से पहले उस समस्या को जड़ से जानना एवं समझना जरूरी होता है.
इस समस्या के साथ तीन बाते जुड़ी हुई हैं,बच्चे,उनके माता-पिता एवं मोबाइल.हमें यह जानना जरूरी है की बच्चे किस उम्र से किस उम्र तक के माने जायेंगे.बच्चे किस कक्षा से किस कक्षा तक के मान्य होंगे तथा मोबाइल किस प्रकार का मान्य होगा.
ऊपर की तरफ हम बच्चों की उम्र अट्ठारह वर्ष मान सकते हैं,क्योंकि उसके उपर बच्चे वयस्कों की श्रेणी में आ जायेंगे.नीचे की तरफ हम बच्चों की उम्र छ वर्ष मान कर चलेंगें,क्योंकि आजकल बच्चे चार पांच वर्ष की उम्र से ही मोबाइल पर खेल खेलने लगते हैं.
कक्षा के हिसाब से प्रथम या द्वितीय कक्षा से लेकर बारहवी कक्षा तक के बच्चों को हम इस श्रेणी में रखेंगे.
वह सभी बच्चे इस श्रेणी में आयेंगे जो छोटे-बड़े किसी भी शहर में रहते हैं और उसी शहर में पास या दूर स्कूल पढ़ने जाते हैं.किसी दूसरे शहर में छात्रावास में रह कर पढ़ने वाले बच्चे इस श्रेणी में नहीं शामिल होंगे.
अब मोबाइल के बारे में जान ले,मोबाइल दो प्रकार के होते हैं एक साधारण मोबाइल एवं दूसरा स्मार्ट मोबाइल.आजकल के बच्चे स्मार्ट मोबाइल रखना पसंद करते हैं.
एक बात और मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर दो प्रकार की सेवा प्रदान करते हैं,प्रीपेड और पोस्टपेड.आजकल के बच्चे प्रीपेड सेवा लेना पसंद करते हैं.
हमारे हिसाब से बच्चों के हाथ में मोबाइल देना आज की आवश्यकता है, मापा-पिता एवं बच्चों दोनों की सहूलियत के लिए है.
इस आवश्यकता को हम किस तरह से बच्चों को प्रदान करेंगे,कि वे इस ज़रुरत का ग़लत इस्तेमाल न कर सके,जिसके कारण M.L.A.साहेब बच्चो से इस सुविधा को वापस ले लेना चाहते हैं.
हमें यह जानना ज़रुरी है की बच्चे इस सुविधा का गलत इस्तेमाल कैसे और क्यों करते हैं.स्मार्ट मोबाइल होने की वजह से और प्रीपेड सेवा की वजह से.
स्मार्ट फ़ोन होने की वजह से बच्चे,इन्टरनेट,फेसबुक कैमरा इत्यादि का सही और ग़लत इस्तेमाल करते हैं जिसकी वजह से कभी कभी परेशानिया आ जाती हैं.
प्रीपेड सेवा होने की वजह से बच्चे अपने जेबख़र्च में से मोबाइल रिचार्ज कराते हैं और बहुत देर देर तक,पता नहीं किस-किस से बातें करते हैं,जिसका पता माता-पिता को नहीं चल पाता है,जो बाद में कभीकभार परेशानी का सबब बनता है.
कैसा मोबाइल और किस सेवा के साथ मोबाइल हमको बच्चों को देना है,अब यह जानने की बारी आ गयी है.
1.हमें बच्चों को साधारण मोबाइल देना है,जिसमे इन्टरनेट ना हो कैमरा ना हो,सिर्फ़ बात करने की सुविधा हो,जिससे बच्चे हमें अपने बारे में ख़बर कर सके एवं हम बच्चों की ख़बर ले सकें,बस.
2.हमें बच्चों को पोस्टपेड मोबाइल सेवा के अंतर्गत कनेक्शन दिलवाना होगा,जिसका बिल माता-पिता के पते पर आयेगा,जिससे उन्हें यह पता रहेगा कि उनका बच्चा किससे बात करता है, कितनी देर बात करता है और कितनी बार बात करता है.बच्चे को भी यह डर रहेगा की उसे सही जगह,सही लोगों से संभल कर ही बात करनी है,क्योंकि माता-पिता को सब पता रहेगा
अब हमें सरकार एवं मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कम्पनियां को साथ में लेकर,उपरोक्त ज़रुरत के अनुरूप मोबाइल सेवा प्रदान करवानी होगी.
इस कनेक्शन में निम्न ज़रूरते पूरी होनी चाहिए.
1.बच्चों के नाम से माता-पिता की सरपरस्ती में पोस्टपेड कनेक्शन आवंटित हो, जिसका बिल माता-पिता के पते पर जाएगा.
2.इस कनेक्शन में साधारण मोबाइल ही इस्तेमाल होगा,हो सके तो मोबाइल कम्पनियां कम खर्च में अच्छा साधारण मोबाइल दें जिसमे सिर्फ बात हो सके.
3.छ से बारह वर्ष तक के बच्चों को पचास रूपए प्रति माह में,एवं बारह वर्ष से अट्ठारह वर्ष तक के बच्चों को सो रूपए प्रति माह के हिसाब से बिल बने.
4.पचास रूपए में पचीस पैसे प्रति मिनट के हिसाब से दो सो मिनट एवं सो रूपए में चार सो मिनट की बात करने की सुविधा मिलनी चाहिए.
मोबाइल कम्पनियों के लिए भी यह सौदा घाटे का न होकर बहुत फायदे का साबित होगा क्योंकि पढ़ने जाने वाले बच्चों की तादाद भारतवर्ष में कई करोड़ में है.सरकार को भी इस झंझट और बहस से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा.माता-पिता लोगों को भी बच्चों के लिए होने वाले एक तरह के तनाव से मुक्ति मिलेगी. हाँ कुछ बड़े बच्चों को जो बच्चे होने के बावजूद कुछ ज्यादा आज़ादी चाहते है, और अपने-आप को अट्ठारह वर्ष से कम होने के बावजूद भी व्यस्क समझने की भूल करते हैं, उन्हें हमारे इस सुझाव से कुछ अड़चन हो सकती है,जिसके लिए हमें कोई खेद नहीं है, क्योंकि हम यह कार्य उनकी,उनके माता-पिता एवं समाज की भलाई के लिए करना चाह रहे हैं.
अगर आपको हमारा यह प्रयास एवं सुझाव पसंद आये तो हमें ज़रूर बताए.धन्यवाद्.
K.C.MEHROTRA
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ReplyDeleteअपनी राय अवश्य दें.धन्यवाद.